
ऐसा शानदार रहा है करियर
न्यूजीलैंड के इस दिग्गज हरफनमौला खिलाड़ी ने अपने करियर के दौरान 62 टेस्ट और 215 वनडे मुकाबलों में शिरकत की, जिसमें उन्होंने 3320 टेस्ट रन और 4950 वनडे रन बनाये। इस दौरान अपनी गेंदबाजी से भी उन्होंने काफी प्रभावित किया और 218 टेस्ट विकेट और 201 वनडे विकेट भी झटके। टेस्ट क्रिकेट में क्रिस ने 13 बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया जबकि एक बार मैच में 10 विकेट भी हासिल किये। अगर उनके घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के साथ मिला दिया जाये तो वह ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 21 हजार से ज्यादा रन बनाए और 1100 से ज्यादा विकेट लिये।

भारत से छीना था चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब
अपने करियर के दौरान इस ऑलराउंडर खिलाड़ी ने न्यूजीलैंड को कई शानदार मैच जिताने का काम किया लेकिन साल 2000 में भारत के हाथों से आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी की जीत को छीनने का श्रेय इसी खिलाड़ी को जाता है। साल 2000 में इस टूर्नामेंट को आईसीसी नॉकआउट कप के नाम से जाना जाता था जिसमें भारत और न्यूजीलैंड फाइनल में खिताब के लिये एक-दूसरे से भिड़े थे। सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने इस मैच में जबरदस्त बल्लेबाजी की और गांगुली के 117, सचिन के 69 रनों की पारी की बदौलत भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 264 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में कीवी टीम ने महज 109 रन पर अपने 4 विकेट खो दिये थे।
भारत को उम्मीद थी कि वह इस मैच को जीत जायेगा लेकिन क्रिस ने नाबाद 102 रनों की पारी खेलकर भारत के हाथों से मैच छीन लिया और न्यूजीलैंड की टीम को इकलौता आईसीसी खिताब जिताया।

इस कारण हीरो से जीरो बन गये क्रिस केर्न्स
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद क्रिस केर्न्स को इंडियन क्रिकेट लीग में मैच फिक्सिंग जैसे गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा, जिसे उन्होंने पूरी तरह से नकार दिया था। उन पर यह आरोप कीवी टीम के पूर्व क्रिकेटर लुऊ विसेंट और पूर्व कप्तान ब्रैंडन मैकलम ने लगाये थे कि क्रिस केर्न्स ने उन्हें फिक्सिंग का ऑफर दिया था। लुई विंसेंट को आगे चलकर मैच फिक्सिंग में दोषी पाया गया, लेकिन क्रिस केर्न्स पर कभी भी यह आरोप साबित नहीं हो सके।

बस धोकर कर रहे गुजारा, पाई-पाई को हुए मोहताज
मैच फिक्सिंग के आरोपों के बाद क्रिस के आर्थिक हालात काफी खराब हो गये और परिवार को पालने के लिये उन्हें ऑकलैड के एक शेल्टर होम में बस धोने का काम करना पड़ा। इतना ही नहीं उन्होंने ऑकलैंड नगरपालिका के लिए ट्रक चलाने का काम भी किया। मौजूदा समय में वह एक गुमनाम क्रिकेटर की जिंदगी जी रहे हैं। वो ना ही सोशल मीडिया पर दिखाई देते हैं और ना ही न्यूजीलैंड के अखबारों की सुर्खियां बनते हैं। देश के लिये इतना नाम कमाने वाला खिलाड़ी कभी ऐसी जिंदगी जीने को मजबूर होगा यह शायद ही कभी किसी ने सोचा होगा।


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