
1. हर खिलाड़ी को साथ लेकर चलना जरूरी-
कई बार भारतीय क्रिकेट में इस तरह की बातों का जोर ज्यादा देखा गया कि युवाओं को ज्यादा वरीयता मिलनी चाहिए। धोनी ने कप्तानी मिलते ही अनुभव को दरकिनार करना शुरू किया था और युवाओं को टीम में महत्व देना शुरू किया। धीरे-धीरे सफेद गेंद क्रिकेट केवल युवाओं का खेल हो गया और अनुभवी लोग टेस्ट क्रिकेट में अधिक सक्रिय हो गए। टी20 में तो और भी ज्यादा युवाओं को लेने की मांग रहती है लेकिन रोहित शर्मा ने एक बात साफ कही है कि हर खिलाड़ी पर नजर रखना जरूरी है और सबको तराशना हैं। किसी एक खिलाड़ी पर जोर देने की जगह टीम को युनिट के तौर पर देखना है।
राहुल द्रविड़ भी कहते हैं कि अनुभव और युवा दोनों महत्वपूर्ण हैं लेकिन इनमें संतुलन चाहिए। आपको आज की भी जरूरत का ध्यान रखना होगा और भविष्य की टीम का भी निर्माण करना होगा। कोच कप्तान की इन बातों ने सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों में एक तसल्ली दी होगी कि मौका मिलता रहेगा। वे रेस से कभी बाहर नहीं होंगे।

2. हर खिलाड़ी को खुलने का मौका देने पर जोर रहेगा-
द्रविड़ और रोहित के व्यक्तित्व की सबसे बेहतरीन बात यही है कि हर कोई उनमें अपनी झलक देख सकता है। वे साधारण भी हैं, समझदार भी, स्टाइलिश भी और सुपर मैच्योर भी। दोनों ही गंभीर होने के बावजूद बहुत सरल स्वभाव के हैं जिनसे हर कोई कनेक्ट हो जाता है।
मयंक अग्रवाल तो द्रविड़ के बारे में बताते हैं कि आप उनको कभी भी कॉल करो और वे उपलब्ध रहते हैं। उनसे बात करना बहुत आसान हैं। रोहित के बारे में भी मुंबई इंडियंस खेमे से यह बातें कई बार कही जा चुकी हैं। रोहित न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले से पहले की शाम को कहते भी हैं कि, केएल राहुल और मेरा सबसे बड़ा रोल यही होगा कि हर खिलाड़ी को उसके खुलने की आजादी दी जाए। भले ही ऐसा करने में आप हमेशा सफल ना हों। रोहित ने युवाओं के लिए खासतौर पर यह संदेश दिया है।
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दूसरी ओर राहुल द्रविड़ साफ कर चुके हैं कि वे टीम में पहले से मौजूद माहौल को भांपने में थोड़ा समय लेंगे। उनके लिए महत्वपूर्ण यह है कि खिलाड़ी तन और मन दोनों से फिट रहें।

3. खिलाड़ियों को मिलेगा लंबा मौका-
विराट-शास्त्री के युग में हमने पहले सफेद गेंद क्रिकेट में रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा की जोड़ी को टूटते हुए देखा क्योंकि उनकी जगह कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल ने ले ली थी। फिर कुलचा भी टूट गया और अब जडेजा और अश्विन ने फिर से सफेद गेंद क्रिकेट में एक जोड़ी की तरह वापसी की है। इस दौरान कुलदीप यादव फलक से गायब हो गए जबकि उनको रवि शास्त्री ने एक समय भारत का नंबर एक ओवरसीज स्पिनर घोषित कर दिया था।
रोहित ने यहां कुछ बारीक बातें की हैं। वे मानते हैं कि एक खिलाड़ी में चाहे कितनी भी क्षमता हो लेकिन उसका रोल अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अलग होता है। यही कारण है कि कुछ खिलाड़ी आईपीएल में बेहतर करते हैं लेकिन इंटरनेशनल में उतना नहीं खेल पाते। कई सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में चमकते हैं। रोहित ने कहा है कि टी20 फॉर्मेट में एक खिलाड़ी को उसका रोल समझाना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि वो अपने क्षमता के हिसाब से नहीं बल्कि टीम में फिट होने वाले अपने रोल के हिसाब से प्रदर्शन करके दिखा सके। इस काम में समय लग सकता है, हो सकता है कुछ ही मैच बाद खिलाड़ी अपने रोल के खांचे में फिट हो जाए। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि खिलाड़ी को लंबा मौका दिया जाए और रोहित पूरी तरह इस बात के पक्षधर हैं।

4. फॉर्मेट नहीं, फॉर्म को देखा जाएगा-
हाल के सालों में भारत के टॉप के प्रदर्शन ने यह बातें बहुत ज्यादा चला दी थी कि अपनी टीम हर फॉर्मेट में अलग प्लेइंग इलेवन खिलाने की काबिलियत रखती है। ऑस्ट्रेलिया में पिछले दौरे पर जो ऐतिहासिक जीत मिली वह युवाओं ने ही दिलाई थी। इसके बाद श्रीलंका में भी भारतीय टीम द्रविड़ की कोचिंग में तब सफेद गेंद सीरीज खेलने गई जब पहले से ही मुख्य टीम इंग्लैंड में खेल रही थी।
द्रविड़ ने अलग फॉर्मेट अलग टीम की सारी हवा को ठंडा कर दिया है। उनका कहना है कि वे खिलाड़ी की ओर देख रहे ना की अलग-अलग फॉर्मेट में अलग टीम को बनाना चाहते हैं। द्रविड़ मानते हैं कुछ खिलाड़ी किसी खास फॉर्मेट में बेहतर करते हैं और कुछ तीनों फॉर्मेट में अच्छा करते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण चीज यह है कि खिलाड़ी जिस भी प्रारूप में खेले उसमें पूरी तरह तैयार रहे। वह उस मैच की स्थिति में बिल्कुल 100 प्रतिशत मन से तैयार रहे। किसी तरह की पेशोपश ना हो। यहां पर मानसिक सेहत अहम हो जाती है। सही मानसिकता सही नतीजे लेकर आती है और द्रविड़ इस लेवल पर काम करने के लिए तैयार हैं।

5. सबके रोल को लेकर क्लियर, कोहली का किरदार भी तय-
रोहित-द्रविड़ की जोड़ी ने सभी खिलाड़ियों के रोल को लेकर बहुत संजीदगी दिखाई है। यहां तक की कमान छोड़ चुके विराट कोहली की अहमियत एक खिलाड़ी की तौर पर अभी भी अहम है। रोहित ने एक लीडर कोहली की जगह पर एक अनुभवी खिलाड़ी कोहली पर ज्यादा फोकस किया है। हालांकि वे मानते हैं कि बहुत ज्यादा अनुभव होने की वजह से कोहली टीम में बड़ी वैल्यू लेकर आते हैं। टीम की स्थिति के अनुसार कोहली को अपने रोल के साथ तालमेल बैठाना पड़ सकता है।
कोहली के लिए सभी टी20 मैच खेलना भी जरूरी नहीं होगा। वे पहले ही वर्कलोड की बात कर चुके हैं। राहुल द्रविड़ ने भी फुटबॉल का उदाहरण देते हुए साफ किया है कि बड़े खिलाड़ी सारे मैच में खेलें यह जरूरी नहीं है। लेकिन उनका शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट रहना जरूरी है। द्रविड़ चाहते हैं कोहली जैसे खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह फिट रहें।


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