BCCI नहीं तोड़ेगा चीनी कंपनी से करार, कहा- पैसों से हो रहा है भारत को फायदा

BCCI नहीं तोड़ेगा चीनी कंपनी VIVO से करार, VIVO बना रहेगा IPL का title sponsor | वनइंडिया हिंदी

नई दिल्ली। लद्दाख में चीन के सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों पर किए गए हमले की देशभर में आलोचना हो रही है। लोगों ने अब चीन का विरोध करने हुए चीनी सामान को त्यागने की मुहीम लगाई है। वहीं व्यापारियों ने भी चीन की कड़ी आलोचना करते हुए उनके साथ व्यापार ना करने की मांग की। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने चीन को सबक सिखाने की तैयारी भी कर ली है, लेकिन इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई ने साफ कह दिया है कि वो आईपीएल के प्रायोजक वीवो से करार खत्म नहीं करेगी।

संगकारा और जयवर्धने ने मांगे सबूत, लगा है 2011 वर्ल्ड कप फिक्स करने का आरोपसंगकारा और जयवर्धने ने मांगे सबूत, लगा है 2011 वर्ल्ड कप फिक्स करने का आरोप

इसलिए नहीं तोड़ सकते करार

इसलिए नहीं तोड़ सकते करार

धूमल ने बयान देते हुए कहा, ''हमें भारतीय और चीनी हित के बीच के अंतर करने की आवश्यकता है। पैसा भारत में आ रहा है न कि चीन में जा रहा। हमें यह समझना होगा कि चीनी कंपनी को उसके हित में सहयोग करने और चीनी कंपनी के जरिए देश का हित साधने में बड़ा फर्क है। जब हम भारत में चीनी कंपनियों को उनके उत्पाद बेचने की अनुमति देते हैं तो जो भी पैसा वे भारतीय उपभोक्ता से ले रहे हैं, उसमें से कुछ बीसीसीआई को ब्रांड प्रचार के लिये दे रहे हैं और जो भी पैसा आ रहा है उसमें से 42 फीसदी भारत सरकार और भारतीय सेना के पास जा रहा है।''

जब तक करार है तो कोई बुराई नहीं

जब तक करार है तो कोई बुराई नहीं

इसके अलावा धूमल ने साफ किया कि वह भविष्य में चीनी कंपनी के साथ करार करने से पहले विचार विमर्श करेंगे लेकिन फिलहाल जो अनुबंध हैं उन्हें पूरा करने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा, ''मैं निजी तौर पर चीन के सामान पर आत्मनिर्भरता कम करने के पक्ष में हूं। लेकिन जब तक वहां की कंपनियों को देश में बिजनेस करने की इजाजत है, तब तक अगर कोई चीनी कंपनी आईपीएल जैसे भारतीय ब्रांड को स्पॉन्सर करती है तो उसमें कोई बुराई नहीं।''

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440 करोड़ रूपए का है सालाना करार

440 करोड़ रूपए का है सालाना करार

बता दें कि मोबाइल निर्माता कंपनी वीवो ने 2199 करोड़ रुपए की बोली लगाकर 2017 में पांच साल के लिए आईपीएल के टाइटल प्रायोजन अधिकार हासिल किए थे। इस तरह सालाना करार 440 करोड़ रूपए का रहा जो 2022 में खत्म होगा।

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Story first published: Thursday, June 18, 2020, 21:20 [IST]
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