Democracy XI: घर पर पापा का पड़ा था शव और कोहली मैदान पर अपनी टीम को हारने से बचा रहे थे
नई दिल्ली। दौलत और शौहरत की बुलंदी पर बैठे टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने आज अपने खेल से साबित कर दिया है कि इंसान अपने दम पर दुनिया जीत सकता है, बशर्ते उसके इरादे नेक हों और वो उसकी मेहनत में जूनून हो। आज कोहली की हर बात पर लोगों की निगाहें होती हैं, कोहली क्या पहनते हैं, क्या खाते हैं, क्या पसंद करते हैं और किस चीज से नफरत करते हैं, इन सारी बातों को जानने के लिए उनके फैंस दिन-रात बेकरार रहते हैं लेकिन जिंदगी में कोहली को ये सब यूं ही नहीं मिला है, कोहली के संघर्ष और मेहनत में उनके पिता प्रेम कोहली का बहुत बड़ा हाथ है, जिनकी दुआओं ने कोहली को विराट बनाया है।

पापा पेशे से वकील थे
पत्रकार राजदीप सरदेसाई की किताब 'डेमॉक्रेसी इलेवन' में कोहली के जीवन का वो अंक प्रकाशित हुआ है, जिसके बारे में शायद काफी लोगों को पता नहीं होगा। किताब कहती है कि अपने घर के सबसे छोटे विराट अपने पापा के काफी करीब थे, उनके पापा पेशे से वकील थे और वो ही 9 साल के कोहली को अपने साथ स्कूटर पर बैठाकर पहली बार वेस्ट दिल्ली क्रिकेट अकादमी लेकर गए थे।

निधन 54 के साल की उम्र में
उन्होंने ही कोहली को अपने सपनों संग जीने की आजादी थी, उनकी दिली तमन्ना थी एक दिन उनका बेटा देश के लिए खेले लेकिन इसे विधि का विधान कहिए या फिर और कुछ कि आज उनका नन्हा कोहली विराट तो बन गया है लेकिन उसे देखने के लिए वो इस दुनिया में नहीं हैं। विराट के पिता प्रेम कोहली का निधन 54 के साल की उम्र में 2006 में ब्रेन स्ट्रोक के कारण हो गया था।

दिल्ली का स्कोर 103 तक पहुंचा दिया
उस वक्त विराट की उम्र महज 18 साल थी और वह दिल्ली रणजी टीम की ओर से कर्नाटक के खिलाफ खेल रहे थे। पहले दिन कर्नाटक ने पहली पारी में 446 रन बनाए थे, दूसरे दिन पांच विकेट गिर जाने से दिल्ली की टीम मुश्किल में फंस गयी थी। विराट के सामने मैच बचाने की चुनौती थी वो क्रीज पर थे और दूसरे छोर पर पुनीत बिष्ट बल्लेबाजी कर रहे थे, दोनों ने मिलकर दिल्ली का स्कोर 103 तक पहुंचा दिया। कोहली 40 रन बनाकर उस दिन नाबाद लौटे, लेकिन उसी रात विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली का निधन हो गया।

कोहली ने 90 रन की पारी खेली
जब ये खबर ड्रेसिंग रूम में आई तो सबको लगा कि कोहली ये सदमा झेल नहीं पाएंगे और वो तुरंत घर को चले जाएंगे, कोच ने तो कोहली की जगह किसको खिलाना है, इस बात का भी फैसला कर लिया था, अगले दिन पूरी टीम मैच खेलने के लिए मैदान पर आई थी कि तभी कोहली हाथ में बल्ला लेकर मैदान पर पहुंच गए। कोहली को वहां देखकर हैरान रह गए, किसी के पास कोई शब्द नहीं थे कोहली के लिए। उस दिन कोहली ने 90 रन की पारी खेली और आउट हो गए।

खेल के बाद पिता के अंतिम संस्कार में गए
आउट होने के बाद कोहली ड्रेसिंग रूम गए और पहले देखा कि वो कैसे आउट हुए और फिर उसके बाद वो अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए चले गये। जब वो जा रहे थे उस समय दिल्ली की टीम को मैच बचाने के लिए मात्र 36 रन की दरकार थी।
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