150 साल से ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड में जारी है 'एशेज' हासिल करने की जंग, कैसे पड़ा सीरीज का ये नाम

नई दिल्ली: गुरुवार 1 अगस्त से एक और एशेज सीरीज का शुभारंभ हो रहा है, इस बार एशेज इंग्लैंड में खेली जाएगी। ये सीरीज ना केवल विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत के लिए चर्चाओं में है बल्कि स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर की टेस्ट वापसी के कारण भी सुर्खियां बटोर रही है। कंगारू टीम इंग्लैंड में 2001 के बाद से कोई एशेज सीरीज नहीं जीत पाई है जबकि इंग्लैंड के लिए 2017 में मिली एशेज सीरीज की शर्मनाक हार का बदला लेने का मौका है। इन सबके बीच एक सवाल यह है कि इस सीरीज का नाम एशेज क्यों पड़ा? इंग्लैंड की टीम ने ऑस्ट्रेलिया के साथ 1861-62 में खेलना शुरू कर दिया था लेकिन इन दोनों ने अपना पहला टेस्ट 1877 में खेला था। जबकि एशेज की कहानी 1882 में शुरू हुई थी।

एशेज: क्रिकेट की सबसे पुरानी 'जंग'

एशेज: क्रिकेट की सबसे पुरानी 'जंग'

1882 में ऑस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड में एकमात्र टेस्ट खेलने के लिए गई थी बिली मर्डोक ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान थे जबकि अल्बर्ट हॉर्बी घरेलू टीम के कप्तान थे जिन्होंने रग्बी में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। तब इंग्लैंड की टीम तब अपनी ऑस्ट्रेलिया से मिली हार को पचा नहीं पाई थी। ऑस्ट्रेलियाई टीम उस समय इंग्लैंड की कॉलोनी (जब एक देश पर दूसरे देश का आशिंक या पूर्ण कब्जा होता है) टीम थी। इसके साथ ही यह प्रतिद्वंदता काफी गंभीर हो गई क्योंकि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को उसकी घरेलू जमीन पर नहीं हराया था। ऑस्ट्रेलिया ओवल के मैदानन पर ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए 80 ओवर में 63 रन बनाए और वह ऑल-आउट हो गई। जवाब में इंग्लैंड की टीम भी 71.3 ओवर में 101 रन बनाकर आउट हो गई। फ्रेडरिक स्पोफोर्थ ने 36.3 ओवर में 47 रन देकर 7 विकेट लिए। जियोर्गे यूलेट ने सर्वाधिक 26 रन बनाए थे।

एक आर्टिकल के मातम ने एशेज को दिया जन्म-

एक आर्टिकल के मातम ने एशेज को दिया जन्म-

इसके बाद जब कंगारूओं की दूसरी पारी शुरू हुई तो वे 63 ओवर में 122 रन बना सके और इंग्लैंड को मैच जीतने के लिए केवल 85 रनों की दरकार थी लेकिन अंग्रेज केवल 77 रन बनाकर आउट हो गए और ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 7 रनों से जीत लिया। कॉलोनी से मिली इस हार से इंग्लिश फैंस को काफी शर्मशार कर दिया। उस समय इंग्लैंड के अखबारों में खबर छपी- हम अपनी कॉलोनी से कैसे हार गए? पिछली बार हम ऑस्ट्रेलिया में विदेशी हालातों में हारे थे, लेकिन इस बार घर में कैसे हार गए? क्या हम एक छोटी टीम हैं? हार को लेकर इंग्लैंड में इतनी निराशा थी कि अगले दिन के स्पोर्टिंग टाइम्स (अब डिफंक्ट) में इंग्लिश क्रिकेट को लेकर एक निंदनीय आर्टिकल छपा, यहीं से इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रतिद्वंद्विता को संकेत देने के लिए 'एशेज' शब्द के जन्म की शुरुआत हुई।

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किवदंतिया बन चुकी एशेज की अन्य कहानियां-

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यह लेख पत्रकार रेगिनाल्ड शर्ली वॉकिन्सहॉव ब्रूक्स द्वारा कुछ ऐसे लिखा गया था: "इंग्लिश क्रिकेट के स्नेहपूर्ण स्मरण में, जिसका निधन 29 अगस्त 1882 को ओवल में, इस अवसर पर बड़े दुख के साथ दोस्तों और परिचितों ने घेरा बनाकर दीप जलाए। ध्यान दिया जाए कि शव को जलाया जाएगा और एशेज (राख) ऑस्ट्रेलिया ले जाई जाएगी।" बस यहीं से एशेज शब्द का नींव पड़ी। बता दें कि इस शब्द के हिंदी मायने राख या भस्स होते हैं। इस शब्द ने तत्कालीन इंग्लिश कप्तान ह्यूगो ब्लीग को अंदर तक झंकझोर कर रख दिया और उन्होंने घोषणा की वे ऑस्ट्रेलिया में होने वाली अगली टेस्ट (जो उस साल के अंत में होनी थी) में एशेज को वापस हासिल कर लेंगे। उन्होंने वास्तव में ऐसा किया भी और तीन मैचों की वह सीरीज 2-1 से जीत ली। कहा यह भी जाता है कि मेलबर्न में महिलाओं के एक समूह ने लकड़ी के एक बेल को जलाया उसकी राख को छोटे से कलश में डाला और एक इंग्लिश नेवल ऑफिसर को निजी उपहार के रूप में दे दिया। उसके बाद से इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दोनों में 150 साल से एशेज का रिकवर करने का खेल चल रहा है। बता दें कि एशेज क्रिकेट में सबसे क्लासिक और सबसे महान प्रतिद्वंदता का प्रतीक मानी जाती है।

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Story first published: Wednesday, July 31, 2019, 14:41 [IST]
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