नजरिया : इस टूर्नामेंट को भूल जाइए, बताैर कप्तान तो कई दिग्गजों को पछाड़ते हैं कोहली

स्पोर्ट्स डेस्क(राहुल) : जरूरी नहीं आपको हर चीज हासिल हो। किसी की एक कमी को देखकर इक्कीस खूबियों को फीका समझ लेना ओछापन दिखाता है। विराट कोहली ने जब 2011 के फाइनल में भारत को चैंपियन बनाने के लिए जो 35 रनों की अहम पारी खेली थी, उससे दिखा था कि उनमें दवाब में भी खेलने की क्षमता है। तीनों फाॅर्मेट की कप्तानी संभालने के बाद भी कोहली ने बल्ले से लगातार रन बरसाए। देश-विदेशों में टीम को बड़ी जीत दिलाई, लेकिन टीम कोई आईसीसी टूर्नामेंट उनकी कप्तानी में नहीं जीत पाई। इसे हम चाहे फिर कोहली का खराब भाग्य समझें। कोहली की कप्तानी की आलोचना चारों तरफ होती दिखी। सोशल मीडिया पर मजाक बनाने वालों को आईसीसी टूर्नामेंट भूल जाना चाहिए और देखना चाहिए कि कोहली ने इसके अलावा भी देश के लिए क्या-क्या अहम योगदान दिया है।

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बताैर कप्तान तो कई दिग्गजों को पछाड़ते हैं कोहली

बताैर कप्तान तो कई दिग्गजों को पछाड़ते हैं कोहली

बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित तो किए ही हैं, लेकिन बताैर कप्तान भी वह कई दिग्गजों को पीछे छोड़ते हैं। कोहली साल 2012 में वनडे के उप-कप्तान बने थे। फिर साल 2014 में जब महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट से संन्यास लिया तो कोहली को कप्तान बनाया गया। टेस्ट में कप्तानी करना सीमित ओवरों के मुकाबले मुश्किल रहता है, लेकिन कोहली ही थे जिन्होंने इस जिम्मेदारी को उठाते हुए बल्लेबाजी में भी दम दिखाया। 2017 में कोहली सभी फाॅर्मेट के कप्तान बन गए थे। इस दाैरान कोहली ने देश-विदेशों में जीत हासिल की। दिसंबर 2018 में कोहली सभी दिग्गजों को पछाड़ते हुए इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में टेस्ट मैच जीतने वाले पहले एशियाई कप्तान बने। ऐसा करना कोई आसान काम नहीं था। विदेशी पिचों पर टीम में जुनून भरने में एक कप्तान का भी उतना ही रोल रहता है जितना कि बीसीसीआई प्रबंधन निभाता है और कोहली ने इसे बखूबी निभाया है।

कप्तानी दवाब के चलते छोड़ी ना कि असफलता देखकर

कप्तानी दवाब के चलते छोड़ी ना कि असफलता देखकर

ऐसा मानना भी सही नहीं रहेगा कि कोहली ने ट्राॅफी ना जीत पाने की असफलता देखकर अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट से कप्तानी छोड़ने का फैसला लिया। वो दवाब हो सकता, जिसके चलते उन्हें यह फैसला लेना पड़ा। ठीक वैसे ही जैसे धोनी ने पहले टेस्ट की कप्तानी छोड़ी थी, फिर कुछ समय बाद अन्य दोनों फाॅर्मेट की भी छोड़ दी थी। लगातार 5-6 साल तक तीनों फाॅर्मेट की कप्तानी करना मानसिक रूप से खिलाड़ी को परेशान कर ही सकती है। हम अन्य देशों की प्लानिंग देखें तो उन्हें टेस्ट के लिए अलग तो वनडे, टी20आई के लिए अलग कप्तान रखे हैं ताकि एक ही खिलाड़ी पर अधिक दवाब ना आ सके। इसके अलावा कोहली की टी20आई कप्तानी में असफलता का सवाल दूर-दूर तक नहीं बनता।

वो ऐसे, कि कोहली का मैच विनिंग पर्संटेज महेंद्र सिंह धोनी, इयोन मोर्गन, आरोन फिंच, केन विलिमसन, शाहीद अफरीदी से काफी बेहतर रहा है। कोहली ने टी20आई करियर में मैच विनिंग पर्संटेज 64.58 रखा है। कोहली ने 50 मैचों में टीम को 30 में जीत दिलाई है, जबकि 16 में हार मिली है। वहीं दो मैचों का नतीजा नहीं निकला। वहीं धोनी हैं जिनका मैच विनिंग पर्संटेज 59.28 है। धोनी ने बताैर कप्तान सबसे ज्यादा टी20आई मैच खेले। उन्होंने 72 मैचों में 41 जीते थे।

रन भी तो बरसे हैं

रन भी तो बरसे हैं

जनवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ जब भारत ने तीन मैचों की टी20 सीरीज खेली थी तो उसी में पहली बार कोहली को कप्तानी मिलने का माैका मिला था। तब से लेकर अब तक कोहली ने इस फाॅर्मेट में ना सिर्फ रोमांचक जीत दिलाईं, बल्कि बल्ले से रन भी बरसाए। कप्तानी संभालने से पहले कोहली ने 45 टी20आई मैच खेले थे। फिर 2017 से लेकर 2021 तक उन्होंने बताैर 50 मैच खेले तो इस दाैरान उनका बल्ला खूब रन बरसाने में भी सफल रहा। यही कारण है कि कोहली इस समय अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उनके नाम अब 95 मैचों में 3227 रन दर्ज हैं, जिसमें सबसे ज्यादा 29 अर्धशतक भी हैं। खास बात यह है कि कोहली इस फाॅर्मेट में सबसे ज्यादा 52.04 की एवरेज से रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी हैं। उन्होंने यह कर्तिमान कप्तानी करते हुए ही दर्ज किए हैं, ऐसे में वीरेंद्र सहवाग का कहना एकदम सही है कि भारतीय टीम को कोई दूसरा कोहली मिलने वाला नहीं है। कोहली के रूप में क्रिकेट जगत को एक महान खिलाड़ी मिला है। उनके प्रति सोशल मीडिया पर ट्रोल करने वाले क्या रिएक्शन दे रहे हैं, उनकी फिक्र नहीं करना चाहिए।

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Story first published: Tuesday, November 9, 2021, 15:19 [IST]
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