
गेंद से नहीं तो बल्ले से ही सही
रविंद्र जडेजा भले ही टीम में मुख्य स्पिनर गेंदबाज शामिल किए गए हों लेकिन वे बल्ले से भी कमाल का प्रदर्शन करते हैं। इसीलिए अब वे कोहली की टीम में बतौर ऑलराउंडर अपनी भूमिका अच्छे से निभा रहे हैं। जडेजा ने साल 2009 में भारत के श्रीलंका दौरे पर खेले गए पांचवे और आखिरी वनडे से अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरूआत की थी। इस मैच में भारत की और से जडेजा ने एक भी विकेट नहीं लिया था लेकिन बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 60 रनों की पारी खेली थी।

उतार-चढ़ाव भरा रहा है जडेजा का करियर, आईपीएल से मिली लय
जडेजा को शुरूआती करियर में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई बार उन्हें टीम से बाहर किया गया, काफी समय तक वह टीम में अपनी जगह ही नहीं बना पाए थे। लेकिन फिर आईपीएल ने उन्हें वो मौका दिया जो शायद कोई और नहीं दे सकता था। आईपीएल के पहले सीजन में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान शेन वॉर्न ने जडेजा को अपनी टीम में जगह दी थी। जडेजा ने अपने पहले आईपीएल में गेंद से कोई खास प्रदर्शन नहीं किया लेकिन बल्ले से उन्होंने 14 मैचों में 131 के स्ट्राइक रेट से 135 रन बनाए।

शेन वार्न के इस शब्द का मतलब नहीं समझ पाए थे जडेजा
आईपीएल के पहले सीजन में जडेजा शेन वार्न के साथ खेले थे। जडेजा एक वाक्या सुनाते हुए कहते हैं कि शेन वार्न उन्हें 'रॉकस्टार' कहकर बुलाते थे। तब जडेजा को इस शब्द का मतलब भी नहीं पता था। हालांकि बाद में जब उन्हें पता चला कि रॉकस्टार उनकी तारीफ में वे बुलाते हैं तो जडेजा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आज टीम इंडिया के खिलाड़ी रविंद्र जडेजा को जड्डू व रॉकस्टार के नाम से भी बुलाते हैं जो शेन वार्न का दिया हुआ नाम है।

चेन्नई सुपर किंग्स ने बदल की जडेजा की जिंदगी
रविंद्र जडेजा को 2012 में आईपीएल की सबसे सफल टीम चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलने का मौका मिला। कभी राजस्थान की तरफ से खेलने वाले रविंद्र जडेजा ने 2015 के आईपीएल सीजन में मात्र 11 रन देकर राजस्थान टीम के खिलाफ चार विकेट लिए थे जो आईपीएल में उनका सबसे बेहतरीन स्पेल था। जडेजा ने इसके बाद ना केवल आईपीएल में बल्कि भारतीय टीम के लिए भी कई और बेहतरीन स्पेल डाले। मौजूदा समय में रविचंद्रन अश्विन के बाद वह भारतीय टीम के सबसे सफल ऑलराउंडर हैं।

पिता सिक्योरिटी गार्ड और मां थीं नर्स, ऐसा रहा जडेजा का परिवार
रविंद्र जडेजा आज लग्जरी लाइफ जीते हैं लेकिन कभी इनके पिता अनिरूद्ध सिहं एक सिक्योरिटी गॉर्ड थे और उनकी मां लता नर्स का काम करती थीं। जडेजा की दो बहने हैं नैना और पद्मिनी जडेजा। साल 2005 में जब जडेजा की मां का देहांत हो गया।

दो बार खेला है अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्डकप, कोहली ने बना दिया 'करियर'
रविंद्र जडेजा ने अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्डकप दो बार खेला है। 2006 में खेले गए अंडर-19 विश्व कप में भारत फाइनल तक पहुंचा था लेकिन फाइनल मैच में पाकिस्तान ने जीत हासिल की थी। वहीं 2008 में विराट कोहली की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच जीतकर भारत ने अंडर-19 विश्व कप पर कब्जा किया था। रवींद्र जडेजा भी इस टीम का हिस्सा थे। उन्होंने इस मैच में दो विकेट लिए थे। इसी के बाद से जडेजा को टीम इंडिया में रास्ता साफ हो गया। आज भी जडेजा कोहली का कप्तानी में टीम में खेल रहे हैं।

इसलिए कहते हैं 'सर जडेजा'
रवींद्र जडेजा ने 2012 दिसंबर में रणजी ट्रॉफी के दौरान रेलवे के खिलाफ नाबाद 320 रनों की पारी खेली थी। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह उनका तीसरा तिहरा शतक था। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तीन बार तिहरा शतक लगाने वाले वे पहले और एकमात्र भारतीय हैं। इसके साथ ही वे ऐसा कारनामा करने वाले दुनिया के आठवें बल्लेबाज बन गए। इस श्रेणी में सर डॉन ब्रैडमैन भी शामिल हैं। जब उन्होंने तीसरी बार तिहरा शतक ठोंककर सर डॉन ब्रैडमैन की बराबरी की और अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया तो कप्तान महेंद्र सिंह धौनी मजाक-मजाक में उन्हें सर रवींद्र जडेजा कहने लगे। बस, इसके बाद से उनका नाम पड़ गया सर रवींद्र जडेजा।

दुनिया के जबरदस्त फील्डर हैं जडेजा, ऐसा रहा है उनका करियर
जडेजा ने टीम इंडिया के लिए 34 टेस्ट (दिल्ली टेस्ट के पहले तक), 136 वनडे और 40 टी20 मैच खेले हैं। टेस्ट क्रिकेट में 1187 रन और 160 विकेट, वनडे में 1914 रन और 155 विकेट व टी 20 में 116 रन और 31 विकेट उनके नाम पर दर्ज हैं।


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