
कोहली और अश्विन के बीच कोई समस्या है?
अश्विन इंग्लैंड सीरीज को लेकर इतनी गंभीर थे कि जब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल हारने के बाद भारत के बाकी खिलाड़ी पूरे जोश और मजे में छुट्टी मनाने निकल गए तो रविचंद्रन काउंटी क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी को सुधारने के लिए चले गए थे। अश्विन को आने वाली टेस्ट सीरीज में अच्छी भूमिका निभानी थी और उन्होंने द ओवल के मैदान पर ही काउंटी मैच में 6 विकेट लेकर बढ़िया संकेत दिए थे। ऐसा भी नहीं कि इससे पहले भी उनकी फॉर्म खराब थी क्योंकि उन्होंने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की प्रत्येक पारी में दो-दो विकेट निकाल कर दिए जब भारतीय तेज गेंदबाजी फेल हो गई थी।
इसके विपरीत रविंद्र जडेजा बल्ले और गेंद दोनों से निरंतर तौर पर इंग्लैंड में फेल रहे। ऐसे में समझ नहीं आता कि रविंद्र जडेजा की जगह पर रविचंद्रन अश्विन को क्यों नहीं खिलाया गया। इससे पहले आस्ट्रेलिया की धरती पर भी रविचंद्रन अश्विन ने 12 विकेट लिए थे जहां उनका औसत 28.83 रहा था और उन्होंने सिडनी में मैच बचाने वाली नाबाद 39 रनों की पारी भी खेली थी।
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2019 में अश्विन ने कही थी एक बात-
पता नहीं टीम में क्या चल रहा है लेकिन रविचंद्रन अश्विन की पत्नी ने अभी एक वीडियो शेयर की है जिसमें अश्विन की बेटी टेलिस्कोप टाइप लगाकर अपने पिता को मैदान में ढूंढ रही है। ऐसा भी नहीं है कि अश्विन और टीम मैनेजमेंट के बीच अभी सब कुछ गलत नजर आता है और पहले सब सही था, क्योंकि इस तरह की चीजें करीब दो-तीन साल से चल रही है जिनसे यह इशारा मिलता है कि रविचंद्रन अश्विन और टीम मैनेजमेंट अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ते हैं।
हमें टीम मैनेजमेंट और रविचंद्रन अश्विन के बीच संबंधों पर रोशनी डालने के लिए 2019 का इंटरव्यू याद करना होगा जब अश्विन ने कहा था, "या तो मैं पांच विकेट लूंगा या फिर मुझे बाहर कर दिया जाएगा।" यह दरअसल अश्विन ने उस समय टीम कोच रवि शास्त्री को जवाब दिया था जो कह चुके थे कि कुलदीप यादव अब भारत के ओवरसीज टेस्ट मैचों में पहली पसंद के स्पिनर होंगे। तब कुलदीप यादव ने छह टेस्ट मैचों में केवल 24 ही विकेट लिए थे जबकि अश्विन 65 मैचों में 350 विकेट ले चुके थे और कुलदीप के साथ तो उनका कोई मुकाबला ही नहीं था।

गेंदबाजी में जडेजा कहीं भी अश्विन के सामने नहीं हैं-
क्या अश्विन टीम मीटिंग में ऐसा कुछ बोलते हैं जो आला कमान को पसंद नहीं आता? अश्विन साफ तौर पर अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं और कोई नहीं जानता उनकी कौन सी बात किसको कैसे बुरी लगी हो। अश्विन ने पहले भी इस बात को दोहराया है कि वे एक दिन भारतीय टीम को लीड करना चाहेंगे। हालांकि विराट कोहली चाहे तो यह तर्क दे सकते हैं कि उन्होंने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में इंग्लैंड की परिस्थितियों में तीन तेज गेंदबाज और रविचंद्रन अश्विन के साथ रविंद्र जडेजा को उतारने का कॉन्बिनेशन रखा था लेकिन वह मुकाबला हार गए थे। उसके बाद विराट कोहली ने चार तेज गेंदबाजों के साथ इंग्लैंड पर अटैक करने की जिद सी पकड़ ली है और शायद इसकी अपने फायदे हो सकते हैं लेकिन हमको यह भी समझना चाहिए कि टीम के बेस्ट स्पिनर को ही बाहर कर देना इस फायदे को भी खत्म कर देता है।
हम लीड्स टेस्ट में से देख चुके हैं कि इंग्लैंड की टीम के पार्ट टाइम ऑफ स्पिनर मोईन अली भारतीय बल्लेबाजों को लगातार तंग कर रहे थे और अगर भारतीय टीम में तब अश्विन होते तो कुछ तो दबाव इंग्लैंड पर डाला ही जा सकता था। इस टेस्ट सीरीज से पहले रविंद्र जडेजा 13 टेस्ट मैचों में 69 के स्ट्राइक रेट के साथ 29 विकेट ले चुके हैं जबकि रविचंद्रन अश्विन ने इसी दौरान 14 टेस्ट मैचों में 71 विकेट लिए हैं जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 46 का रहा है जो किसी तेज गेंदबाज की मानिंद लगता है। भले ही रविंद्र जडेजा ने एक बल्लेबाज के तौर पर अपने आप को हालिया समय में विकसित किया हो लेकिन एक गेंदबाज के तौर पर भी अश्विन के सामने कहीं भी नहीं ठहरते हैं और समय के साथ उनकी गेंदबाजी की धार कुंद भरी पड़ी है।

कोहली की कप्तानी में पेचीदगी क्यों बढ़ जाती है-
अश्विन ने पहले भी दिखाया है कि तेज गेंदबाजों के माकूल विकेटों पर 4 तेज गेंदबाजों को उतारने के बजाय एक वर्ल्ड क्लास स्पिनर को उतारना फायदेमंद साबित हो सकता है। रविचंद्रन अश्विन ने बाएं हाथ के बल्लेबाजों को 200 से ज्यादा बार आउट किया है और इंग्लैंड की टीम में रॉरी बर्न्स, डेविड मलान और मोईन अली जैसे खिलाड़ी हैं जिन पर अश्विन नकेल कर सकते थे। आज विराट कोहली अपने बल्ले से भी रन बनाने से जूझते हैं और पिछली 70 पारियों में उनके बल्ले से शतक भी नहीं निकला है जबकि इसका उनके चेहरे पर और उनकी बातचीत में मलाल तक नजर नहीं आता।
कोहली की कप्तानी पर भी सवालिया निशान हैं लेकिन रवि शास्त्री के साथ बहुत अच्छे संबंधों के चलते कोई भी इस जोड़ी के खिलाफ बोल नहीं सकता। जब विराट कोहली 2015 में कप्तान बने थे तो उसके बाद से अभी तक भारत को जो बेस्ट रिजल्ट मिला है वह आस्ट्रेलिया में हाल ही में आया है लेकिन तब विराट कोहली कप्तान नहीं थे क्योंकि वह 36 रनों पर शर्मनाक तरीके से भारत के आउट होने के बाद अपनी टीम को छोड़कर स्वेदश रवाना हो गए थे। उनको अनुष्का के साथ रहना था और अपनी बेटी के आगमन का इंतजार था। तब पूरे तीन टेस्ट मैच भारतीय टीम विराट कोहली के बिना खेली और अजिंक्य रहाणे ने लीडर की भूमिका निभाते हुए हारी हुई बाजी पलटकर भारत को एक महानतम जीत में से एक दिलाई। कौन जानता है की लीडरशिप में बदलाव से शायद विराट कोहली की बैटिंग का तंगी का दौर भी गुजर जाए!


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