
भारत का दक्षिण अफ्रीका दौरा 2018-
यह बतौर कप्तान विराट कोहली का सबसे पहला दक्षिण अफ्रीका दौरा था और वह रवि शास्त्री के गाइडेंस में खेले थे। यह विश्वास जताया जा रहा था कि टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका में इस बार इतिहास जरूर रच देगी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने पहला टेस्ट मुकाबला 72 रनों से हरा और दूसरा मैच सेंचुरियन में 135 रनों से हरा। लेकिन भारत अंतिम मुकाबले तक आते-आते वापसी कर चुका था और उन्होंने 63 रनों से दक्षिण अफ्रीका को पीट दिया।
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जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या का उभार-
यह सीरीज भारत के लिए यादगार इसलिए थी क्योंकि यहां पर जसप्रीत बुमराह ने एक पेसर के तौर पर अपने उभार को छुआ था। वह ऐसे खिलाड़ी थे जिन पर सबकी नजरें थी क्योंकि वह टेस्ट फॉर्मेट में पहली बार विदेशी दौरा कर रहे थे। बुमराह ने तीन मैचों में 14 विकेट चटकाए और वे इस सीरीज में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले बॉलर बने। उस सीरीज में फिलैंडर, कगिसो रबाडा और मोहम्मद शमी ने 15-15 विकेट आपस में चटकाए थे।
बुमराह की तरह हार्दिक भी एक नए चेहरे थे जो दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गए थे। उन्होंने अपने आप को एक विश्वसनीय ऑलराउंडर के तौर पर स्थापित किया। हार्दिक बिरयानी एक अर्धशतक के साथ उन तीन मुकाबलों में 119 रन बनाए थे और अहम मौकों पर कुछ बेहतर पारियां खेली।

भुवनेश्वर कुमार का भरोसा, शमी की लय-
यह वह समय था जब भुवनेश्वर कुमार टेस्ट मैचों में नियमित तौर पर खेलते थे और उन्होंने घरेलू बल्लेबाजों को अपनी स्विंग बॉल से लगातार झुंझलाहट में रखा। 2018 के दौरे पर उन्होंने तीन मुकाबलों में 10 विकेट चटकाए और भारत के लिए तीसरे सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले गेंदबाज थे।
2018 के दौरे पर मोहम्मद शमी विदेशी दौरे पर प्रभाव छोड़ने वाले बॉलर बने क्योंकि उन्होंने तीन मैचों में 15 विकेट लिए थे और उनका बॉलिंग एवरेज 17.04 था जो कि सीरीज के बेस्ट बॉलिंग एवरेज में दूसरे नंबर पर था। उन्होंने एक बार पांच विकेट एक पारी में भी लिए जो कि जोहांसबर्ग टेस्ट में आए थे और भारत ने इस मुकाबले को जीत लिया था।

कोहली की फॉर्म, अश्विन का तेज विकेट पर प्रदर्शन-
विराट कोहली 2018 में बहुत ही जबरदस्त बल्लेबाजी फॉर्म में थे। यह कहना सही होगा कि विराट कोहली कुछ-कुछ ऐसे ही थे जैसे कि 1990 के दशक में सचिन तेंदुलकर हुआ करते थे। विराट कोहली ने उस दौरे पर एक शतक और एक अर्धशतक के साथ तीन मैचों में 286 रन बनाए। उन्होंने 47.67 की औसत से बल्लेबाजी की और उस पूरी सीरीज में सबसे ज्यादा बाउंड्री लगाने वाले खिलाड़ी बने और उनकी बाउंड्री की संख्या थी-35।
साउथ अफ्रीका की पिचें तेज गेंदबाजी की मदद करने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन अश्विन ऐसे एकमात्र स्पिनर थे जिन्होंने टॉप-10 विकेट लेने वाले गेंदबाजों में जगह बनाई थी। उन्होंने 2 मैचों में 7 विकेट लिए थे और 30.71 के ठीक-ठाक औसत से विपरीत परिस्थितियों में बॉलिंग की थी।


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