क्रिकेट के साथ भी जेटली का रहा गहरा संबंध, मांफी मांगने पर मजबूर हुए थे केजरीवाल
नई दिल्ली। देश ने आज यानि शनिवार ऐसे कद्दावर नेता को खोया है जिसने जीएसटी के जरिए एक देश-एक टैक्स की नींव रखी थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की, जिन्होंने 66 की उम्र में शनिवार दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर अंतिम सांस ली। जेटली लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हे 9 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था। जेटली केंद्र की मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वित्त मंत्री रहे थे। राजनीतिक के अलावा जेटली क्रिकेट के क्षेत्र से भी जुड़े रहे। दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन का वो विवाद भला काैन भूल सकता है जब जेटली चारों ओर से आलोचनाओं से गिरे, पर जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उनके खिलाफ उतरे तो उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।

पहले जेटली पर लगे थे आरोप
दरअसल, जेटली 1999 से 2012 तक डीडीसीए के अध्यक्ष थे। जब वो वित्त मंत्री थे तो उस वक्त डीडीसीए विवाद खड़ा हुआ था, जो उनके गले की फांस बन गया था। ये विवाद काफी चर्चाओं में रहा था। इसको लेकर केजरीवाल और जेटली अदालत में आमने-सामने आ गए थे। डीडीसीए के पूर्व सदस्यों और पूर्व क्रिकेटरों बिशन सिंह बेदी और कीर्ति आजाद ने जेटली के डीडीसीए अध्यक्ष पद पर रहने के दौरान उसके संचालन में कई तरह की अनियमितताएं और कुप्रबंधन का आरोप लगाया था। इसके बाद जेटली ने काफी आलोचनाओं का सामना करा था।
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जांच में पाई गई हेराफेरी
28 सितंबर 2012 को कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने एन सी बख्शी की शिकायत के आधार पर जांच शुरु की और जांच में ये सामने आया कि साल 2006 से 2012 के बीच डीडीसीए में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता के 23 उदाहरण मिले। इस समय 2006 से 2012 तक अरुण जेटली ही डीडीसीए के अध्यक्ष थे। उस जांच में फंड्स की हेराफेरी, करों का भुगतान न करना, निविदा मार्ग का पालन न करना, दागी लेखा परीक्षकों को काम पर रखना और सदस्यता के प्रबंधन, टिकटिंग और अन्य के संबंध में अनियमितताएं शामिल रहीं।

पर नहीं था जेटली का कोई लेना देना
जांच के बाद विरोधी पार्टियां जेटली को घेरने में लग गईं। हालांकि जेटली अपने उपर लगने वाले सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। इन कथित वित्तीय अनियमितताओं के दौरान अरुण जेटली भी डीडीसीए के अध्यक्ष थे, इसलिए इस विवाद से उनका नाम भी जुड़ा। SFIO ने अपनी जांच में जेटली को इस मामले में ये कहते हुए क्लीन चिट दे दी थी कि जेटली डीडीसीए के गैर-कार्यकारी चेयरमैन थे और उनका उसके रोजमर्रा के कामों से लेनादेना नहीं था।
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केजरीवाल ने मांगी थी माफी
जेटली पर आरोप लगने पर केजरीवाल खूब उनके खिलाफ बोले थे। लेकिन खुद को निर्दोष पाए जाने के बाद जेटली ने केजरीवाल के खिलाफ उनका नाम डीडीसीए में कथित वित्तीय अनियमितताओँ में घसीटने के लिए उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। अप्रैल 2018 में अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के चार नेताओँ संजय सिंह, आशुतोष, राघव चड्ढा और दीपक वाजपेयी ने जेटली पर डीडीसीए में कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाने के लिए कोर्ट में माफी मांगी थी, जिसके बाद जेटली ने मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया था।
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