लंदन। सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट जगत का वो सितारा है जिसने अपनी चमक से देशवासियों को हमेशा गौरवान्वित किया है। आमतौर पर हमेशा शांत रहने वाले सचिन ने पहली बार अपने बचपन के दोस्त विनोद कांबली के बारे में मुंह खोला है।
रिकार्डों की सेज पर बैठे शतकवीर सचिन के दोस्त विनोद कांबली भी एक प्रतिभावान क्रिकेटर थे लेकिन अपनी गलतियों की वजह से उन्हें समय से पहले ही क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा।
मात्र 17 टेस्ट खेलने वाले कांबली के बारे में सचिन ने टेलिग्राफ से कहा , मैं प्रतिभा के बारे में बात नहीं करुंगा क्योंकि उसका निर्धारण करना मेरा काम नहीं है,लेकिन जहां तक अंतर का सवाल है तो मैं यही कहूंगा कि हम दोनों की लाइफ स्टाइल काफी अलग थी, हम दोस्त तो थे लेकिन हमारा नेचर काफी अलग था इसलिए हमलोगों ने हमेशा हालातों का सामना अलग ढंग से किया। मेरी फैमिली को हमेशा पता होता था कि मैं कहां हूं, कैसे हूं, क्या कर रहा हूं, किसके साथ हूं, वगैरह- वगैरह लेकिन मैं विनोद के बारे में कुछ कह नहीं सकता हूं।
मेरी और कांबली की लाइफस्टाइल बिल्कुल अलग थी
मालूम हो कि साल 2011 में विनोद कांबली ने क्रिकेट के हर प्रारूप से संन्यास ले लिया था हालांकि वो काफी लंबे समय से क्रिकेट की मुख्य धारा से अलग थे। फिल्मों, एलबम, एड करने के बाद अक्सर विनोद कांबली आपको एबीपी चैनल पर क्रिकेट एक्सपर्ट के रूप में नजर आते हैं और ऐसा कई बार लोगों ने देखा भी है कि जब सचिन मैदान में रनों की बौछार कर रहे होते थे तो विनोद जोर-जोर से उन्हें अपना दोस्त कहकर पुकारते थे।
लेकिन पिछले साल जब सचिन ने अपने संन्यास की घोषणा की और अपनी फेरवेल स्पीच पढ़ी तो उसमें उन्होंने अपने दोस्त विनोद का जिक्र नहीं किया था जिसका कि विनोद को काफी मलाल भी रहा था। इस बारे में बात करते हुए विनोद ने कहा था कि अब मैं और सचिन दोस्त नहीं है। मैं इस बात से निराश हूं कि उसने अपनी फेयरवेल स्पीच में मेरा नाम तक नहीं लिया। मुझे लगता है कि उसे मेरे बारे में कुछ कहना चाहिए था क्योंकि हम दोनों ने एक साथ ही अपने करिअर की शुरूआत की थी। एक ही कोच की देखरेख में खेले भी थे।
कांबली का कहना है कि हमने बहुत सारी बातें एक दूसरे से शेयर की। कांबली ने कहा कि शारदाश्रम स्कूल में हमारे बीच 664 रनों की जो साझेदारी हुई थी। वह हम दोनों के करिअर के लिए लाइफ चेंजिंग साबित हुई। मुंबई टेस्ट में जितना भावुक सचिन था मैं भी कई बार खुद को रोने से नहीं रोंक पाया लेकिन उसने जिस तरह से देश और क्रिकेट की सेवा की, मैं उसे सैल्यूट करता हूं।
सचिन ने कभी मेरी मदद नहीं की
कांबली का कहना था कि हम एक दूसरे से लगभग सात साल पहले मिले थे। इसके अलावा 2009 में एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में कांबली ने कहा था कि सचिन ने मेरे करिअर के मुश्किल दौर में मेरी मदद नहीं की थी।