नेट बॉलर ने परचून की दुकान चलाकर बेटे को सिखाया क्रिकेट, अब U-19 WC में खेलेंगे सिद्धार्थ

नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट दुनिया भर के खेलों में अपनी एक खास जगह इसलिए बनाता है क्योंकि देश में अभी भी इस खेल को खेलने का जैसा जुनून है वैसा दुनिया में अन्य खेलों के प्रति थोड़ा कम ही देखने को मिलता है। 1990 के दशक में क्रिकेट भारत की जिंदगी था। कई मुकाबले ऐसे होते थे जिसकी चर्चा कई दिन तक होती है। लोगों के पास चर्चाओं को सबसे मजेदार टॉपिक क्रिकेट ही होता था। मैचों को लोग अपनी सांसे थाम कर देखते थे और तब से लेकर अब तक समय बहुत तेजी से बदला है, T20 फॉर्मेट भी आया है और विश्व पहले से कहीं ज्यादा ग्लोबल हो गया है लेकिन अभी भी भारत में क्रिकेट का क्रेज कम नहीं हुआ है।

सिद्धार्थ यादव की कहानी-

सिद्धार्थ यादव की कहानी-

टीम इंडिया के पास आज दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले क्रिकेटर भी मौजूद हैं और कई ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो बहुत ही प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच पल बढ़कर एक सफल इंटरनेशनल क्रिकेटर बन पाए। एक गरीब परिवेश से आकर क्रिकेट में नाम कमाने की नई कहानी हैं- सिद्धार्थ यादव जो दिल्ली के खिलाड़ी यस ढुल की कमान में वेस्टइंडीज में अगले महीने होने वाले अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए खेलेंगे।

अंडर-19 क्रिकेट आमतौर पर भारतीय क्रिकेट की बुनियाद माना जाता है। इस टीम में और भी कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो काफी जद्दोजहद करके अपनी एंट्री कर पाए हैं। टीम के कप्तान ही यस ढुल की तरह सिद्धार्थ भी ऐसे खिलाड़ी हैं। गाजियाबाद के रहने वाले सिद्धार्थ यादव बहुत संघर्ष करने के बाद टीम इंडिया की अंडर-19 स्क्वाड में एंट्री कर पाए। सिद्धार्थ का क्रिकेट में आना उनके पिता की एक महत्वकांक्षा भी थी। पिता का नाम श्रवण यादव है जो खुद भी एक क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन वह नेट में ही गेंदबाजी करने तक सीमित हो गए। बाद में जब उनका खुद एक बेटा हुआ तो उसको क्रिकेटर बनाने के लिए उन्होंने जैसे मन में ही कोई प्रतिज्ञा कर ली थी।

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पिता प्रोविजन स्टोर चलाते हैं-

गाजियाबाद के कोटगांव में सिद्धार्थ के पिता एक प्रोविजन स्टोर चलाते हैं और अब अपने परिवार के ख्वाब को आगे बढ़ाते हुए सिद्धार्थ संयुक्त अरब अमीरात में एशिया कप और फिर वेस्टइंडीज में अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलते हुए दिखाई देंगे। इस दौरान श्रवण यादव ने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए बताया है कि उनका सपना हमेशा यही था कि बेटा एक क्रिकेटर बने।

सिद्धार्थ बाएं हाथ के बल्लेबाज भी पिता की वजह से ही बने हैं क्योंकि जब उन्होंने पहली बार बल्ला पकड़ा और एक बैट्समैन के तौर पर स्टांस लिया तभी उनके पिता ने यह निश्चित कर लिया था कि बेटा बाएं हाथ का बल्लेबाज ही बनेगा। इसके बाद पिता के सपने को पूरा करने के लिए मेहनत की बारी सिद्धार्थ की थी जो उन्होंने बखूबी की और उसका फल मिलने जा रहा है।

रोजाना दिन में दुकान बंद करके बेटे को ट्रेनिंग दी-

रोजाना दिन में दुकान बंद करके बेटे को ट्रेनिंग दी-

8 साल की उम्र में ही क्रिकेट खेलने के लिए सिद्धार्थ ने जमीन आसमान एक कर दिया था। उन्होंने इतनी मेहनत की कि अंडर-19 टीम में जगह मिली। पिता का एक प्रोविजनल स्टोर था लेकिन वह भी दिन में उसको 3 घंटे बंद करके बेटे को बल्लेबाजी की प्रैक्टिस करवाते थे। सिद्धार्थ की शुरुआती ट्रेनिंग पिता ने ही दी। छोटे शहरों की कहानी कुछ ऐसी ही होती है।

इसके बाद सिद्धार्थ जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए उनको बेहतर सुविधाएं मिलती रही लेकिन इसके पीछे सिद्धार्थ की प्रतिभा और मेहनत का ही सबसे बड़ा हाथ था।

अगले महीने अंडर-19 वर्ल्ड कप-

अगले महीने अंडर-19 वर्ल्ड कप-

बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम अंडर-19 विश्व कप को अगले महीने खेलेगी और यह कैरेबियाई धरती पर होगा। एक बार फिर से अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम के जीतने की उम्मीद पूरे देश के द्वारा की जा रही है क्योंकि 2020 में भारतीय टीम बांग्लादेश के खिलाफ अप्रत्याशित तरीके से फाइनल में हार गई थी और मैच के बाद काफी बवाल भी हुआ था जिसको भारतीय क्रिकेट भुलाकर आगे बढ़ना चाहेगा। इससे पहले 2018 में भारत ने न्यूजीलैंड में अंडर-19 वर्ल्ड कप अपने नाम किया था और यह चौथी बार ऐसा हुआ था कि टीम इंडिया ने इस आयु वर्ग में यह खिताब अपने नाम किया था।

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Story first published: Tuesday, December 21, 2021, 13:25 [IST]
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