नॉटिंघम टेस्ट : टीम इंडिया की शानदार जीत के ये हैं सात सूरमा

By गौतम सचदेव

नई दिल्ली। इंग्लैंड दौरे पर 0-2 से पिछड़ने के बावजूद भारतीय टीम ने नॉटिंघम टेस्ट में इतिहास रच दिया है। टीम इंडिया ने मौजूदा दौरे में पहली जीत दर्ज की और श्रृंखला का आंकड़ा 2-1 पर पहुँच चुका है। विराट के जेहन में विदेशी जमीन पर जीत की 'भूख' और पूरी टीम के पॉजिटिव इंटेंट ने ही इस मैच की आधारशिला रख दी थी। किसी भी टीम को एक खिलाड़ी के दम पर कभी जीत नहीं मिलती है, इस मैच में मिली जीत के भी एक नहीं कई नायक रहे। एक नजर टीम इंडिया के उन 7 शानदार नायकों के प्रदर्शन पर जिन्होंने न सिर्फ इस दौरे पर मिली पहली जीत में अहम भूमिका निभाई बल्कि कोच शास्त्री के शब्दों में "Negative Bone" को अपने पास तक फटकने नहीं दिया।

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ओपनिंग साझेदारी में 60 का संयोग

ओपनिंग साझेदारी में 60 का संयोग

वेलिंगटन टेस्ट से पहले पिछले 2 टेस्ट मुकाबलों में टीम इंडिया के लिए ओपनिंग साझेदारी सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी थी। पहले दो टेस्ट मुकाबलों में ओपनर टीम को अच्छी शुरुआत देने में नाकाम रहे थे। शिखर को 'सेकेंड चांस' मिला और उन्होंने ठोस शुरुआत की नींव रखी। लॉर्ड्स में मुरली विजय के "डबल गोल्डन डक" के बाद सबसे बड़ी चुनौती एक बेहतर शुरूआत की थी। इसे संयोग कहें या कुछ और लेकिन टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल और धवन ने दोनों पारियों में पहले विकेट के लिए 60 रनों की साझेदारी की और टीम को मजबूती दी। पहली पारी में धवन का पांव और बल्ला दोनों चला और उन्होंने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया। लोकेश राहुल ने भी सूझबूझ भरी पारी खेली। पहली पारी में इन दोनों खिलाड़ियों ने कुल 180 गेंदों का सामना किया और टीम की जीत में नींव माने जाने वाली साझेदारी में अपनी भूमिका बखूबी निभाई।

कोहली-रहाणे की साझेदारी

कोहली-रहाणे की साझेदारी

धवन और लोकेश के आउट होने की बाद पहली पारी में पुजारा एक हुक शॉर्ट खेलकर लंच से ठीक पहले आउट हो गए तो विराट के चेहरे पर एक अजीब सी झुंझलाहट दिखी, विकेट आसान हो चुका था और वो उनसे बड़ी पारी की आस में थे। जिम्मेदारी अब कप्तान और उप-कप्तान के कंधों पर थी और इन दोनों ने एक ऐसी साझेदारी निभाई जिसे क्रिकेट प्रशंसक और खुद ये दो खिलाड़ी भी लंबे समय तक याद रखेंगे। बाहर जाती गेंदों को पोक करने के चक्कर में दो बार आउट हो चुके रहाणे के लिए कप्तान का साथ देना एक बड़ी चुनौती थी। फुटवर्क मूवमेंट को लेकर आलोचना झेलने वाले रहाणे ने 171 मिनट की बल्लेबाजी में 131 गेंदों का सामना किया और 12 चौकों की मदद से 81 रनों की स्ट्रोक मेकिंग पारी खेली वहीं विराट ने तो मानो दुनिया के सारे रिकॉर्ड पलटने की कसम खा ली हो उन्होंने 243 मिनट तक बल्लेबाजी की और 97 रनों पर आउट हो गए। चौथे विकेट के लिए 159 रनों की इस साझेदारी से ऐसा लगा मानो 2-0 से आगे चल रही इंग्लैंड के भी हौसले तोड़ दिए थे। मैच जीतने में इस पारी की दूसरी सबसे बड़ी भूमिका रही।

आलोचकों को पांड्या का डबल 'पंच'

आलोचकों को पांड्या का डबल 'पंच'

टीम इंडिया में ऑल राउंडर के हैसियत से खेल रहे पांड्या पर क्रिकेट दिग्गज सवाल उठा रहे थे। उनके "औसत प्रदर्शन" के बाद कपिलदेव से उनकी तुलना पर माइकल होल्डिंग और गावस्कर जैसे क्रिकेट दिग्गज बिफर पड़े थे लेकिन उन्होंने नॉटिंघम टेस्ट में अपने दमदार प्रदर्शन के बाद पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में "मुंहतोड़ जवाब" भी दिया। पांड्या ने नॉटिंघम में ड्रीम स्पेल डाला। उन्होंने टीम इंडिया के 329 रनों (पहली पारी) का पीछा करने वाली इंग्लिश टीम के पांच विकेट चटकाए। अब तक औसत प्रदर्शन करने वाला यह खिलाड़ी (6 ओवर-1मेडन-28 रन -5 विकेट) के आंकड़े के साथ Honours बोर्ड पर जगह पा चुका था और इंग्लिश बल्लेबाजों को पहली बार किसी मैच में आउटप्ले कर दिया था। इतना ही नहीं दूसरी पारी में भी उन्होंने 52 गेंदों में 52 रनों की आतिशी पारी खेली और आलोचकों की बोलती बंद कर दी। पांड्या के इस पावर-पंच ने टीम की जीत में तीसरी सबसे बड़ी भूमिका निभाई। आशीष नेहरा के बाद पहली बार किसी खिलाड़ी को भारतीय खिलाड़ियों ने विदेशी जमीन पर शानदार प्रदर्शन के लिए गोद में उठाया है।

17 साल बाद दिखा अजीब संयोग :

17 साल बाद दिखा अजीब संयोग :

किसी भी टेस्ट मैच में खिलाड़ी के लिए शतक खास होता है लेकिन खिलाड़ी अगर विराट कोहली हों और उनके शतक से जीत मिले तो वो और भी स्पेशल बन जाता है। 'वर्क लोड' की वजह से लॉर्ड्स टेस्ट में विराट पीठ दर्द से परेशान दिखे तो ऐसा लगा था शायद वो अगला मैच न खेल पाएं लेकिन उनके दृढ विश्वास से वो फिट भी हुए और 200 रनों की पारी खेल कर हिट भी। पहली पारी में 'पुराने साथी" (आदिल और विराट अंडर-19 से दोस्त हैं) के 'प्रलोभन' में आकर विराट एक बाहर जाती गेंद पर आउट हो गए थे। वो 3 रन से अपना शतक चूक गए थे। लेकिन उन्होंने दूसरी पारी में मानो ठान लिया था कि शतक से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं है। उन्होंने दूसरी पारी में 292 मिनट की बल्लेबाजी की और अपना 23वां शतक पूरा किया। उनकी इस बेमिसाल पारी में डिटरमेशन और ठहराव की तारतम्यता चासनी की तरह घुली थी जिसने टीम को 520 रनों की विशाल बढ़त दिलाई। टीम इंडिया की इस जीत में विराट अपनी इस पारी को ताउम्र याद रखेंगे। विराट का यह स्पेशल शतक इसलिए भी खास था कि सचिन तेंदुलकर जिन्हें वो अपना आदर्श मानते हैं उन्होंने ने भी अपने 58वें शतक (2001) में 197 गेंदों को खेलकर 103 रनों की पारी खेली थी और कोहली ने भी इस मैजिक आंकड़े में अपना सैकड़ा पूरा किया।

पुजारा की 'कमबैक पारी'

पुजारा की 'कमबैक पारी'

हाल के दिनों में ऐसा कहा जाने लगा है कि पुजारा आउट होने के नए-नए तरीके ढूंढ लेते हैं। पुजारा पिछले दो सालों में सबसे अधिक बार रन-आउट हुए हैं और नॉटिंघम टेस्ट में भी वो एक ऐसे शॉर्ट पर आउट हुए जो उनकी क्रिकेटिंग डिक्शनरी में शायद ढूंढने से मिले। लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने अपनी इस चूक को सुधार लिया। 292 मिनट की बल्लेबाजी में पुजारा जितनी बार स्टांस ले रहे थे उन्होंने बल्ले को उतनी बार दृढ़ता (पुजारा हर बार बल्ले को बॉटम हैंड ग्रिप से पकड़ने में समय लेते हैं) से पकड़ा और अपनी मैराथन पारी के लिए जाने वाले इस खिलाड़ी ने 208 गेंदों में 72 रनों की पारी खेली। इसे अगर उनका भारतीय क्रिकेट में 'कमबैक' इनिंग कहा जाए तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी।

जसप्रीत बुमराह का कमबैक फीफर

जसप्रीत बुमराह का कमबैक फीफर

किसी भी टीम में चोट के बाद कमबैक करना काफी मुश्किल होता है। चोट के बाद भारतीय टीम में वापसी कर रहे जसप्रीत बुमराह ने दूसरी पारी में नई गेंद लेने के बाद जबरदस्त गेंदबाजी की। बेन स्टोक्स और जॉस बटलर के बीच पांचवें विकेट के लिए 169 रनों की साझेदारी को उन्होंने तोड़ा और इसके ठीक बाद जॉनी बैरस्टो को भी पहली गेंद पर चलता किया। जिस बाउंसर पर उन्होंने लॉर्ड्स टेस्ट के शतकवीर क्रिस वोक्स को आउट किया उसे देख माइकल होल्डिंग ने कमेंट्री के दौरान कहा "मैं ने लंबे समय बाद किसी गेंदबाज को ऐसा बाउंसर करते देखा है". टीम इंडिया की ओर से दूसरी पारी में यह मैच का चौथा और बुमराह की गेंदबाजी में फेंका दूसरा बाउंसर था। उन्होंने 23 गेंदों के अंतराल में 3 विकेट लिए जिसमें एक नो बॉल होने की वजह से चौथा विकेट उनके नाम नहीं हुआ था। उन्होंने अपने कमबैक मैच में फीफर लेकर यह साबित कर दिया कि कप्तान कोहली उन्हें टीम में फिट पाकर कितना खुश थे। नो बॉल पर विकेट लेने के बाद दर्शकों ने उनकी हूटिंग की थी तो पांचवां विकेट लेते ही उन्होंने दर्शकों की ओर देख उन्हें चुप रहने का इशारा भी किया।

शानदार 12 कैच से बना मैच

शानदार 12 कैच से बना मैच

टेस्ट क्रिकेट में हाल के दिनों में टीम इंडिया की स्लिप फील्डिंग पर कई सवाल उठे। टीम इंडिया ने इस मैच से पहले तेज गेंदबाजों पर पिछले 4 सालों में 32 कैच पकड़े और 45 कैच ड्रॉप कर दिए थे। इस आंकड़े को ऋषभ पंत ने पहली पारी में 5 और लोकेश राहुल ने पूरे मैच में 7 शानदार कैच लेकर बदल दिया है। टेस्ट में एक बेहतर कैच मैच को पलट देता है। फील्डिंग में भी टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया हालांकि जब दूसरी पारी में जब बटलर महज 1 रन पर खेल रहे थे तभी ऋषभ पंत ने उनका कैच टपका दिया तो और वो शतक ठोक बैठे। टीम इंडिया की जीत में इन खिलाड़ियों ने कैच लेकर अपनी शानदार भूमिका निभाई।

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    Story first published: Wednesday, August 22, 2018, 16:07 [IST]
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