
कई बार टीम चयन में नहीं मिली कोई भूमिका-
इस खबरों में कितनी सच्चाई है इसका पता कभी ड्रेसिंग रूम के बाहर नहीं लग पाया है। हालांकि ऐसा नहीं है कि उनका इंटरव्यू बिल्कुल एकतरफा तरीके से हुआ। इसके उल्ट शास्त्री को सीएसी के कई सवालों का जवाब देना पड़ा। सीएसी सदस्यों के मुताबिक शास्त्री से भारत के कमजोर मध्यक्रम के बारे में सवाल किए गए जिस पर उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कई बार टीम चयन में शास्त्री की कोई भूमिका ही नहीं होती थी और केवल विराट कोहली ही चयनकर्ताओं के साथ बैठक करके टीम को तय कर देते थे।

शास्त्री ने की ये मांग-
इस बात की जानकारी एक सीओए सदस्य ने इंडिया टू़डे को दी। सीएसी सदस्य ने बताया- 'शास्त्री ने बताया कि टीम मैनेजमेंट को विश्व कप के दौरान मध्यक्रम में उस तरह के खिलाड़ी नहीं मिले जैसे की वे चाहते थे। हालांकि टीम प्रबंधन के पास चयन प्रक्रिया में कोई भी वोटिंग अधिकार नहीं होता। ऐसे में शास्त्री सेलेक्शन मीटिंग्स में कोच और कप्तान दोनों के इनपुट चाहते हैं।' मजेदार बात यह है कि विश्व कप में टीम इंडिया के अनियमित प्रदर्शन का दोष चयन समिति के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद ने टीम प्रबंधन में गले में डाल दिया था।
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अब सपोर्ट स्टाफ का होना है चयन-
प्रसाद ने पंत को विश्व कप भेजने का कारण यह बताया था टीम प्रबंधन ने धवन की जगह पर एक लेफ्ट हैंडर बल्लेबाज की ही मांग की थी ऐस में पंत को भेजने के अलावा कोई और चारा नहीं था। जबकि प्रसाद ने मयंक अग्रवाल को भेजने का कारण भी यही बताया था कि उस समय टीम प्रबंधन को एक बैकअप ओपनर की तलाश थी जिसकी मांग एक मेल के जरिए की गई थी। बता दें कि कुछ दिन बाद टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ का भी चयन होना है और यह चयन सीएसी को नहीं बल्कि चयन समिति को करना है।


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