सचिन का बल्लेबाजी रिकाॅर्ड छोड़िए, गेंदबाजी में भी जबरदस्त थे, देखें आंकड़े

नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर...भारत का वो पूर्व महान क्रिकेटर जिसने अपने नाम कई ऐसे रिकाॅर्ड दर्ज किए हैं जिन्हें तोड़ पाना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान काम नहीं है। 5 फीट 5 इंच के इस खिलाड़ी ने 24 साल तक क्रिकेट खेला। उन्हें लोग लिटिल मास्टर के नाम से पुकारते थे, लेकिन उनके काम लिटिल नहीं रहे। सचिन के नाम सबसे अधिक टेस्ट (200), सबसे अधिक वनडे (463) खेलने का रिकॉर्ड है। दोनों प्रारूपों में क्रमश: 15,921 और 18,463 रन बनाने का रिकाॅर्ड है, इस रिकाॅर्ड के आसपास भी कोई बल्लेबाज माैजूद नहीं है।

यही नहीं, उनके नाम टेस्ट में 51 और वनडे में 49 सर्वाधिक शतक बनाने का रिकॉर्ड भी है। यहां तक कि किसी के पास भी उनसे अधिक अर्धशतक नहीं हैं। तेंदुलकर 68 और 96 अर्द्धशतक के साथ टेस्ट और एकदिवसीय दोनों सूचियों में सबसे आगे हैं। कुल मिलाकर सचिन ने 664 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं, जिसमें 34,394 रन, 100 शतक, 164 अर्धशतक हैं, जिससे उनकी तूती बोलती है। लेकिन आप उनके बल्लेबाजी रिकाॅर्ड को छोड़िए, क्योंकि वो गेंदबाजी में भी जबरदस्त रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 विकेट हैं दर्ज

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 विकेट हैं दर्ज

आपको यह भूलना नहीं चाहिए कि अच्छी बल्लेबाजी के अलावा सचिन अच्छे गेंदबाज भी थे। सचिन एक तेज गेंदबाज बनना चाहते थे, लेकिन वो आस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डेनिस लिली ही थी जिन्होंने एक युवा सचिन को अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा था, जब वह अपने शुरुआती दिनों में एमआरएफ पेस फाउंडेशन गए थे। हालांकि तेंदुलकर ने लिली की सलाह को पूरी गंभीरता से लिया, लेकिन उन्होंने कभी भी गेंदबाजी के लिए अपनी प्रवृत्ति को पूरी तरह से वापस नहीं लिया। वह एक सक्षम गेंदबाज से अधिक थे। उन्होंने वो काम किए जो कभी-कभी टीम में नामित गेंदबाज भी नहीं कर सके। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके नाम 200 विकेट दर्ज हैं जो दिखाता है कि उनकी दिलचस्पी गेंदबाजी में कितनी रही। सचिन ने टेस्ट में 154 तो वनडे में 45 विकेट लिए हैं।

गेंदबाजी के दम पर 1993 में दिलाई थी जीत

गेंदबाजी के दम पर 1993 में दिलाई थी जीत

बल्ले से, तेंदुलकर की महारत ने सभी को हैरान कर दिया। लेकिन उन्होंने गेंद से भी कई बार कामयाबी हासिल की। वह एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने खेल के अंतिम ओवर में एक से अधिक बार सफलतापूर्वक छह या उससे कम रनों का बचाव किया है। इस तरह का पहला उदाहरण ईडन गार्डन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1993 का हीरो कप सेमीफाइनल में देखने को मिला था। 196 रनों का पीछा करते हुए, प्रोटियाज को अंतिम ओवर में छह की जरूरत थी। भारत के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने फैनी डिविलियर्स और ब्रायन मैकुलम का सामना करने के लिए तेंदुलकर को गेंद सौंपी। एक रन चुराने की कोशिश में, डिविलियर्स ओवर की पहली गेंद पर रन आउट हो गए। फिर क्रीज पर आए एलन डोनाल्ड।

दक्षिण अफ्रीका के 9 विकेट गिर चुके थे, ऐसे में उनपर अधिक दवाब था। वहीं सचिन भी डोनाल्ड और ब्रायन को रोकने में सफल हो गए। सचिन ने सिर्फ 3 रन दिए और टीम को 2 रन से जीत दिलाकर फाइनल का टिकट दिलवाया। सचिन इस मैच में बल्ले से 31 गेंदों में 15 रन ही बना सके थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ एक ही ओवर में सुर्खियां बटोर लीं। वह इस मैच में इस्तेमाल किए गए 7वें गेंदबाज थे।

जब सचिन की एक गेंद जीत के लिए साबित हुई अहम

जब सचिन की एक गेंद जीत के लिए साबित हुई अहम

फिर इस तरह का एक और उदाहरण तीन साल बाद आया जब ऑस्ट्रेलिया टाइटन कप, 1996 के दौरान 290 रन के लक्ष्य का पीछा कर रहा था। भारत के सभी गेंदबाजी विकल्प समाप्त होने के बाद, अजहरुद्दीन ने एक बार फिर तेंदुलकर की ओर रुख किया, जिसमें विपक्ष के पास एक विकेट बचा था जबकि जीत के लिए 6 रन चाहिए थे। सचिन फिर लकी साबित हुए जैसे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुए थे। उनकी पहली ही गेंद पर ब्रैड हाॅग ने एक रन चुराने का प्रयास किया लेकिन वो रन आउट हो गए। इसी के साथ भारत को 5 रन से जीत मिल गई। इस मैच में सचिन की एक गेंद मैच को जितवाने में अहम साबित हो गई।

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Story first published: Thursday, June 3, 2021, 11:17 [IST]
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