किस्मत के मारे 10 क्रिकेटर, जिनको 1 टेस्ट के बाद टीम इंडिया में फिर मौका नहीं मिला

नई दिल्ली: आज भी टेस्ट क्रिकेट को किसी भी क्रिकेटर के लिए सर्वोच्च पैमाना माना जाता है। आपके पास पैसा कमाने के लिए टी20 लीगों की भरमार हो सकती है लेकिन असली शोहरत केवल टेस्ट क्रिकेट दिला सकता है। दरअसल क्रिकेट में महानता का ढांचा ही टेस्ट करियर के इर्द-गिर्द बुना गया है। ऐसे में हर क्रिकेटर का, यहां तक कि विशुद्ध टी20 क्रिकेटर का सपना भी यही होता है कि उसके पास एक अच्छा टेस्ट करियर भी हो।

लेकिन टेस्ट मैच खेलना और उसमें निरंतर प्रदर्शन करना आसान नहीं है। कई खिलाड़ी अनेकों मौकों के बावजूद खुद को साबित नहीं कर पाते। इस समय भी दुनिया के पास रोहित शर्मा, ऋषभ पंत, जेसन रॉय, जोस बटलर आदि जैसे नाम हैं जो धुआंधार बल्लेबाजी में नाम बना चुके हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उसी महानता को साबित करना बाकी है। इन खिलाड़ियों को भरपूर मौके भी मिल रहे हैं लेकिन उन खिलाड़ियों को आप क्या कहेंगे जिनको एक ही टेस्ट में मौका देकर हमेशा के लिए भुला दिया गया- दुर्भाग्यशाली खिलाड़ी, यहीं ना!

आज हम आपके सामने ऐसे ही 10 अनलकी भारतीय खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो केवल एक ही टेस्ट खिलाने के बाद बाहर कर दिए गए-

शाहबाज नदीम

शाहबाज नदीम

विकेट - 4, सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 2/18

इस लिस्ट में नवीनतम एंट्री नदीम की है। झारखंड के क्रिकेटर को भारत के लिए टेस्ट मैच में खेलने के लिए मौका तब मिला जब बाएं हाथ के स्पिनर ने अक्टूबर 2019 में रांची में अपने घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पदार्पण किया था। नदीम को भारत कॉल-अप प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। उन्होंने मैच में 4 विकेट लिए, जिसे टीम इंडिया ने एक पारी और 202 रनों से जीता। नदीम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक दिग्गज रहे हैं क्योंकि उन्होंने 117 मैचों में 443 विकेट लिए हैं। हालांकि उसके बाद उनका नाम भविष्य की योजनाओं से गायब दिखता है।

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2. कर्ण शर्मा

2. कर्ण शर्मा

विकेट - 4, सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी - 2/95

उत्तर प्रदेश के दाएं हाथ के स्पिनर ने 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। लेग स्पिनर ने उस खेल में चार विकेट लिए। पहली पारी में उन्होंने डेविड वार्नर (145) और माइकल क्लार्क (128) के विकेट लिए। जबकि दूसरी पारी में उन्होंने क्रिस रोजर्स (21) और वार्नर (102) को आउट किया। भारत के कप्तान के रूप में विराट कोहली के लिए यह पहला टेस्ट था क्योंकि एमएस धोनी बीमारी के कारण चूक गए थे। 74 खेलों में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 196 विकेट हासिल करने वाले कर्ण को फिर कभी भी टेस्ट मैच खेलने के लिए नहीं मिला।

3. नमन ओझा

3. नमन ओझा

रन- 56, उच्चतम - 35, औसत - 28.00

नमन ओझा ने 2015 में भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में तीसरे मैच के दौरान टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। मध्य प्रदेश के विकेटकीपर-बल्लेबाज को राष्ट्रीय टीम में मौका मिला क्योंकि नियमित विकेटकीपर-बल्लेबाज रिद्धिमान साहा चोटिल हो गए। ओझा, हालांकि, अपने पदार्पण खेल में कोई भी छाप छोड़ने में विफल रहे। पहली और दूसरी पारी में उन्होंने क्रमशः 35 और 21 रन बनाए। ओझा ने अब तक 146 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं और 219 के उच्चतम स्कोर के साथ 9753 रन बनाए हैं।

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4. जयदेव उनादकट

4. जयदेव उनादकट

विकेट - 0

सौराष्ट्र के सीनियर तेज गेंदबाज ने 2010 में भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। बाएं हाथ का सीमर सेंचुरियन में खेला था, जिसमें एमएस धोनी की अगुवाई वाली टीम एक पारी और 25 रन से हार गई। उनादकट खेल में बेअसर रहे थे क्योंकि वह दोनों पारियों में विकेट नहीं ले पाए। हालांकि, उनादकट घरेलू सर्किट में काफी प्रभावशाली रहे हैं क्योंकि उन्होंने 89 प्रथम श्रेणी मैचों में 327 विकेट लिए हैं।

पिछले रणजी सीजन में भी उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया था।

5. आर विनय कुमार

5. आर विनय कुमार

विकेट - 1, सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी - 1/73

कर्नाटक के दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था, लेकिन एक छाप छोड़ने में असफल रहे। विनय कुमार ने उस मैच में सिर्फ एक विकेट लिया था जिसे टीम इंडिया ने एक पारी और 37 रनों से गंवा दिया था। उन्होंने उस पारी में 13 ओवर फेंके और माइकल हसी का विकेट चटकाया। विनय ने 139 प्रथम श्रेणी मैचों में 504 विकेट लिए। उन्होंने भारत के लिए 31 वनडे और 9 टी 20 I भी खेले हैं।

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6. निखिल चोपड़ा

6. निखिल चोपड़ा

विकेट - 0

भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर ने अपना पहला और एकमात्र टेस्ट मैच 2000 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बेंगलुरु में खेला था। घरेलू परिस्थितियों में खेलने के बावजूद, चोपड़ा एकमात्र पारी में कोई भी विकेट लेने में नाकाम रहे और उन्हें दूसरी पारी में गेंदबाजी करने का मौका नहीं मिला क्योंकि प्रोटियाज ने भारत को पारी और 71 रनों से हराया। चोपड़ा ने उस खेल में 24 ओवर फेंके, 78 रन दिए और विकेट से महरूम रहे।

7. सबा करीम

7. सबा करीम

रन - 15, उच्चतम - 15

बंगाल के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 2000 में बांग्लादेश के खिलाफ अपना एकमात्र टेस्ट खेला था। सबा करीम ने एक ही पारी में 15 रन बनाए। विडंबना यह है कि वह उस पारी में स्टम्प्ड हो गए थे।

8. रॉबिन सिंह

8. रॉबिन सिंह

रन - 27, उच्चतम - 15 त्रिनिदाद में जन्में ऑलराउंडर ने 1998 में हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ अपने टेस्ट मैच की शुरुआत की। बाएं हाथ के बल्लेबाज यह फीका मुकाबला था, जिसे टीम इंडिया ने 61 रनों से गंवा दिया। वह दो पारियों में केवल 27 रन बना सके और विकेट से महरूम रहे। हालांकि, सिंह का एक अच्छा एकदिवसीय करियर रहा था, वे भारत के लिए 136 वनडे मैच खेल चुके हैं और कई बार अपने दम पर मैच विनर भी साबित हुए।

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9. सलिल अंकोला

9. सलिल अंकोला

विकेट - 2, सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी - 1/35

महाराष्ट्र के दाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लिए अपना पहला और एकमात्र टेस्ट मैच खेला। यह वही खेल था जिसमें सचिन तेंदुलकर ने अपना भारत डेब्यू बनाया था। तेज गेंदबाज ने अपने डेब्यू मैच की दोनों पारियों में एक-एक विकेट लिया। उन्होंने खेल में सलीम मलिक और सलीम यूसुफ के विकेट हासिल किए जो एक ड्रॉ में समाप्त हुए। अंकोला ने हालांकि भारत के लिए 20 वनडे खेले और 13 विकेट चटकाए।

10. इकबाल सिद्दीकी

10. इकबाल सिद्दीकी

रन- 29, उच्चतम - 24

महाराष्ट्र के इस क्रिकेटर ने इंग्लैंड के खिलाफ 2001 में मोहाली में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। सिद्दीकी के लिए भले ही बल्ले और गेंद से यादगार प्रदर्शन नहीं रहा, लेकिन उन्होंने उस टेस्ट के दौरान दूसरी पारी में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों की शुरुआत की। सिद्दीकी सहित, भारत में उस खेल में डेब्यू करने वाले तीन तेज गेंदबाज थे, संजय बांगर और टीनू योहानन। टीम इंडिया ने 10 विकेट से मैच जीत लिया।

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Story first published: Tuesday, July 21, 2020, 16:34 [IST]
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