
शारीरिक और मानसिक फिटनेस जरूरी
टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की तैयारियों के बारे में उमेश यादव ने कहा कि लॉकडाउन में एकमात्र तैयारी चल रही है वह है शरीर की फिटनेस और मानसिक रूप से खुद को मजबूत रखना। हम सभी लोग सकारात्मक रहने की कोशिश कर रहे हैं और टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले पर हमारी नजर है। हम सभी लोग अपनी तैयारी कर रहे हैं ताकि जब हम एकसाथ मिले तो और भी बेहतर हो। बता दें कि टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला इंग्लैंड के साउथैंपटन में खेला जाएगा।

हमारे लिए यह विश्वकप
उमेश यादव ने कहा कि इशांत शर्मा और अजिंक्या रहाणे सही हैं, जब बतौर खिलाड़ी आप टेस्ट मैच खेलते हैं तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप विश्वकप की ही तरह होती है। हमारे लिए यह कह पाना मुश्किल है कि हम भारत के लिए आगे भविष्य में वनडे खेल पाएंगे या नहीं। लिहाजा टेस्ट क्रिकेटर होने के नाते वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप हमारे लिए विश्वकप ही है। मुझे भी ऐसा ही महसूस होता है। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल अलग है क्योंकि आप यहां शीर्ष टीमों को हराकर पहुंचे हैं।

बायो बबल का अनुभव मुश्किल
क्वारेंटीन के अनुभव के बारे में उमेश ने कहा कि यह निसंदेह मुश्किल है, क्वारेंटीन खत्म होने के बाद आप बायो बबल में चले जाते हैं। 10-15 दिन अच्छा लगता है लेकिन बाद में यह थका देता है, आप हर रोज उसी जगह पर रहते हैं, आपके पास सीमित विकल्प होते हैं। यही वजह है कि मानसिक तौर पर फिट रहना बहुत ही जरूरी है। बता दें कि 48 टेस्ट मैच में उमेश यादव ने 148 विकेट अपने नाम किए हैं। टीम में कोच रवि शास्त्री और कप्तान कोहली के बारे में उमेश ने कहा कि वो दोनों बहुत मेहनत करते हैं। जिस तरह से विराट ने टीम की कप्तानी की है, खिलाड़ियों को जो भरोसा औ आजादी कप्तान और कोच ने दी है वह टीम को और भी बेहतर बनाता है। जब बतौर बल्लेबाज और गेंदबाज आप पूरी आजादी से खेलते हैं तो काफी अच्छा करते हैं।


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