
यह नियम पचाना है मुश्किल-
कीवी कप्तान केन विलियमसन ने मैच के बाद कहा है- यह बात पचानी बहुत मुश्किल है कि विश्व कप के विजेता का फैसला बाउंड्री लगाने के आधार पर किया गया। बता दें कि इंग्लैंड ने इस मुकाबले में जहां 26 बाउंड्री यानी चौके-छक्के लगाए थे तो वहीं न्यूजीलैंड केवल 17 ही लगा पाया था। यह आंकड़े सुपर ओवर को मिलाकर हैं। जब विलियमसन से यह पूछा गया कि क्या आप इस नियम से संतुष्ट हैं तो उन्होंने मुस्कराकर कहा- 'मैं समझता हूं ना तो आपने यह सोचा था कि आप ये सवाल करेंगे और ना ही मैंने सोचा था कि मैं ऐसा जवाब दूंगा। हां, काफी भावनाएं उमड़ी हुई हैं। जब दो टीमें इतनी ज्यादा मेहनत करती हैं और नतीजा इस तरह से आता है तो उसको पचाना काफी मुश्किल है।'

बाउंड्री काउंट नियम पर मॉर्गन के विचार जुदा
इसके साथ ही विलियमसन ने कहा कि खेल के शुरू से ही नियम मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद नतीजे को स्वीकारना बहुत कठिन है। विलियमसन ने कहा- 'नियम मैच होने के समय से ही मौजूद थे। लेकिन उसके बाद भी यह कोई नहीं सोचा जा सकता कि हम एक बाउंड्री फालतू लगाकर जीत हासिल कर लेंगे यदि मैच दो बार टाई हो गया तो। ना ही इंग्लैंड ने ऐसा सोचा होगा। मुझे तो यह भी नहीं पता कि हम कितनी बाउंड्री से हार गए। हां, यह बहुत, बहुत मुश्किल है.....हां, आप समझ रहे हैं।' लेकिन इस मामले में विश्व कप चैंपियन कप्तान इयोन मॉर्गन की राय थोड़ी जुदा है।

कप उठाने की तैयारी मैच से पहले ही कर ली थी-
मॉर्गन कहते हैं कि हमको मैच से पहले ही इस नियम के बारे में जागरूकता थी। इसके बाद जब इंग्लैंड रनों का पीछा कर रहा था तब भी वे इसको लेकर बातचीत कर रहे थे। इंग्लिश कप्तान ने कहा- 'जब हम रनों का पीछा करते हुए काफी करीब पहुंच गए तो हमने यह खुद को यह याद दिलाया कि यह मुकाबला सुपर ओवर में जा सकता है या फिर नहीं। इसके अलावा हमने बैटिंग करने से पहले चौथे अंपायर अलीम दार के साथ बातचीत करके भी उनकी पुष्टी ली थी। हमने फील्डिंग पर जाने से पहले भी चेंजिंग रूम में भी इस बारे में बात की थी।'
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