क्या इस बार अॉस्ट्रेलिया की खस्ता हालत का फायदा उठा पाएगी टीम इंडिया?

Will India take advantage of Australian critical condition this time

नयी दिल्ली। हर बार की तरह भारत ने इस बार भी अपने शानदार घरेलू क्रिकेट का लगभग समापन वेस्टइंडीज को बुरी तरह से पीटकर कर लिया है। लेकिन, क्या ये प्रदर्शन अॉस्ट्रेलिया के दौरे के लिए किसी प्रकार से फायदेमंद होगा तो इसका जवाब होगा-नहीं। भारत ने अपनी घरेलू जमीन पर एक बेहद कमजोर विपक्षी के खिलाफ जीत दर्ज की है। इससे पहले हम अपने घर में बड़े से बड़े धुरंधरों को धोकर और विदेशों में मार खाकर वापस आते रहे हैं।

विदेशी पिच पर हारने की पुरानी आदत

विदेशी पिच पर हारने की पुरानी आदत

इस बार जब भारत ने इंग्लैंड का दौरा किया तब भी यही कयास लगाए जा रहे थे कि ये भारतीय टीम कुछ खास है तो वहीं इंग्लिश टीम उसके मुकाबले एकदम पिद्दी। सबने ये तो दावा नहीं किया था कि भारत को वहां 5-0 से जीत मिलेगी, लेकिन हां सबको भारत की जीत की काफी उम्मीदें थी। हालांकि नतीजा वही ढाक के तीन पात वाला हुआ और तू चल मैं आया की तर्ज पर भारतीय टीम 1-4 से पिटकर घर वापस आ गई।

क्यों करें इस बार टीम इंडिया से उम्मीदें

क्यों करें इस बार टीम इंडिया से उम्मीदें

अब हमने वापस आकर विंडीज को धो दिया है और शायद अपनी पुरानी गलतियों से सबक सीखा है तो ऐसे में एक बार फिर से भारत के अॉस्ट्रेलिया दौरे पर चमकदार प्रदर्शन की उम्मीदें की जाने लगी हैं। ये उम्मीदें सिर्फ इसलिए नही की जा रही कि हम पिछले दो विदेशी दौरे में हारकर कुछ सबक जरूर सीखे होंगे, बल्कि ये उम्मीद इसलिए भी की जा रही है क्योंकि बॉल टेपरिंग कांड से जूझ रहे कंगारूओं का मनोबल वाकई में पिछले कुछ समय से खस्ता चल रहा है।

अॉस्ट्रेलियाई कप्तान की निराशा

अॉस्ट्रेलियाई कप्तान की निराशा

इससे ज्यादा और क्या होगा कि टीम के अंदर फैली हुई निराशा अब खुद कप्तान के मुंह से सामने आ रही है। इस बारे में बात करते हुए वनडे टीम के कप्तान एरोन फिंच ने कहा है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) में चल रही उथल-पुथल से टीम का ध्यान भंग हो रहा है और उन्होंने अपने खिलाड़ियों से कहा कि उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि इन बातों का असर उनके खेल पर नहीं पड़े।

अॉस्ट्रेलियाई क्रिकेट का मुश्किल दौर

अॉस्ट्रेलियाई क्रिकेट का मुश्किल दौर

जबसे बॉल टेपरिंग कांड की समीक्षा सामने आई है, अॉस्ट्रेलिया की‘आक्रामक होने की संस्कृति'की कलई भी खुल गई है। हर हाल में जीत के लिए खिलाड़ी धोखाधड़ी का सहारा लेते हैं। इसके बाद पूरी संस्था में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए। डेविड पीवर ने पिछले हफ्ते मुख्य कार्यकारी जेम्स सदरलैंड के नक्शेकदम पर चलते हुए अपना पद छोड़ने का फैसला किया जबकि निदेशक मार्क टेलर इस हफ्ते पद से हट गए और टीम परफोरमेंस निदेशक पैट होवार्ड भी पद छोड़ रहे हैं।

यही है मौके पर चौका मारने का समय

यही है मौके पर चौका मारने का समय

ऐसे में फिंच एक प्रोफेशनल खिलाड़ी के तौर पर ये मान रहे हैं कि टीम को इससे उभरना होगा लेकिन ये बात वो भी जानते हैं कि तेजी से हो रहे बदलाव के साथ तुरंत तालमेल बैठाना इतना आसान नहीं होता। भारतीय टीम भी कहीं ना कहीं ये बात जानती है और अगर शुरूआत के एक दो टेस्ट मैचों में भारतीय दबाव बनाने में कामयाब रहे तो अॉस्ट्रेलियाई खेमा बाकी की सीरीज में बुरी तरह से भी बिखर सकता है।

वैसे तो कंगारू लोग अपने आक्रामक स्वभाव और मैदान पर सख्त खेल दिखाने के लिए जाने जाते हैं लेकिन अब यहीं बातें सवालों के घेरे में हैं और पिछले कुछ समय से टूट फूट के दौर में जी रहे कंगारूओं के सामने अभी तक मरहम लगाने के मौके नहीं आए हैं। कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम के लिए ये एक वाकई में सुनहरा अवसर है।

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    Story first published: Thursday, November 8, 2018, 17:23 [IST]
    Other articles published on Nov 8, 2018

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