नई दिल्ली। पिछले साल 2017 में भारत में फीफा अंडर 17 विश्व कप का आयोजन किया गया था। इस आयोजन के बाद कहा जा रहा था कि ये किसी भी देश द्वारा किए गए अब तक के आयोजनों में सबसे सफल रहा। लेकिन अब सभी सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। कहा जा रहा था कि भारत भी अब फुटबॉल के क्षेत्र में बेहतरीन टीम बनकर उभरेगा।
तत्कालिन खेल मंत्री, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत फुटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अधिकारी इस आयोजन को सफल बता चुके हैं। लेकिन फीफा अंडर 17 विश्व कप टूर्नामेंट के निदेशक जेवियर सेप्पी ने पांचवे 'इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन फुटबॉल बिजनेस' में भारत की मेजबानी को लेकर चौकाने वाले खुलासे किए हैं। सेप्पी ने कहा कि फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूप में चूहों को देखना अव्यवस्था को दर्शाता है।
चिली के रहने वाले सेप्पी ने यह भी कहा कि राजधानी दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित छह मैचों के केवल 47,000 टिकट ही बिके। इस स्टेडियम में एक समय पर 60,000 लोग बैठ सकते हैं, लेकिन हर मैच में केवल 30,000 लोग ही नजर आए। केप्पी ने भारत में इस टूर्नामेंट का आयोजन करने वालों को जमकर फटकार लगाई है। केप्पी ने कहा "मैंने ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों को चूहों के बराबर में कपड़े बदलते हुए देखा है।"
सेप्पी ने कहा कि भारत में ऐसे टूर्नामेंट का आयोजन बहुत मुश्किल है। उन्होंने 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के असफल आयोजन पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'लोग कह रहे हैं कि विश्व कप का आयोजन सफल था, लेकिन मैं सच कहूं, तो एक प्रशंसक के तौर पर मेरे अनुभव से यह प्रशंसकों के लिए सफल नहीं था और यहीं सच्चाई है।'
उन्होंने कहा "भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों ने इस प्रकार का खेल पहली बार देखा था इसलिए वे पहले वाले खेलों की इस टूर्नामेंट से तुलना करने में सक्षम नहीं थे। भारत में टूर्नामेंट का आयोजन करना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि भारत ग्याहर घंटों में किसी समस्या का समाधान करता है।"