
भारतीय टीम का फीफा अंडर-17 विश्वकप तक का सफर
भारतीय टीम ने एएफसी अंडर-16 चैंपियनशिप में सात बार हिस्सा लिया है और 15 वर्ष पूर्व 2002 में उसने क्वार्टर फाइनल तक जगह बनाई थी जो उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा था। हालांकि वह कोरिया से हारकर इसके आगे नहीं बढ़ सका था। पिछले कुछ वर्षों में फुटबॉल को मिले अपार समर्थन और विदेशी मंच पर राष्ट्रीय टीम को मिले एक्सपोज़र की बदौलत भारत की अंडर-16 फुटबॉल टीम ने नेपाल में हुए 2013 दक्षिण एशिया फुटबॉल महासंघ (सैफ) चैंपियनशिप में खिताब जीता था। वहीं सीनियर फुटबॉल टीम की सफलता और फीफा रैंकिंग में निरंतर उसके आगे बढ़ने से भी फुटबॉल की स्थिति में बदलाव आया है।

भारतीय टीम के कोच और उनकी खासियत
टूर्नामेंट में भाग ले रही भारतीय टीम के कोच लुइस नॉर्टन डे मातोस हैं। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने इस साल की शुरुआत में जर्मन कोच निकोलाई एडम को टीम के खराब प्रदर्शन के बाद बर्खास्त कर दिया था। जिसके बाद नए कोच की नियुक्ति के लिए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन ने एक एडवाइजरी बोर्ड बैठाया जिसमें बाइचुंग भूटिया, आई.एम विजयन जैसे खिलाड़ी व बोर्ड में स्टैंड इन टेक्निकल डायरेक्टर सावियो मदीरा और अंडर-17 के COO अभिषेक यादव भी शामिल थे। इन लोगों ने करीब 70 CV की निरीक्षण किया। जिसके बाद केवल 7 कोच को शॉर्टलिस्टेड किया गया। लेकिन फाइनल इंटरव्यू में लुइस नॉर्टन डे मातोस ने AIFF को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। दरअसल लुइस नॉर्टन डे मातोस काफी अनुभवी हैं। माना जाता है कि मातोस के भारतीय टीम के कोच बनने के बाद से टीम ज्यादा संगठित नजर आ रही है। गौरतलब है कि मातोस इससे पहले बेनफिका-B के पूर्व कोच रह चुके हैं। SL Benfica 'B' के कोच रहते समय मातोस ने कई स्टार खिलाड़ी दिए। इनमें रेनटो शाँप, गोनकालो गुडेस और मैनचेस्टर यूनाइटेड द्वारा साइन किए विक्टर लिंडेलफ भी मातस की ही देन माने जाते हैं।

भारतीय टीम के कप्तान और उनकी खासियत
फीफा अंडर-17 वर्ल्डकप में भारतीय टीम की बागडोर मणिपुर के अमरजीत सिंह कियाम संभाल रहे हैं। कप्तानी के लिए उनका चयन आश्चर्यजनक रूप से 'लोकतांत्रिक प्रणाली' से किया गया। दरअसल टीम का कप्तान चुनने का फैसला किसी और का नहीं बल्कि खुद कोच लुइस नॉर्टन डे मातोस का था। कोच ने ही भारतीय टीम के खिलाड़ियों से अंतरिम वोटिंग के जरिये प्लेयर्स को अपना कप्तान चुनने को कहा था जिसमें ज्यादातर खिलाड़ियों की राय अमरजीत के पक्ष में रही। खिलाड़ियों की इस राय का पूरा सम्मान करते हुए मणिपुर के इस खिलाड़ी को टीम का कप्तान चुना गया। अमरजीत सिंह कियाम के पिता किसान हैं जबकि मां मछली बेचती। कयाम मिडफील्डर की पोजीशन पर खेलते हैं। मणिपुर के थाउबाल जिले की हाओखा ममांग गांव के अमरजीत ने फुटबॉल खेलने के लिए बहुत संघर्ष किया है।

भारतीय टीम के वो खिलाड़ी जिन पर होंगी सबकी निगाहें
अनिकेत जाधव- भारतीय टीम के स्टाइकर अनिकेत जाधव के पिता महाराष्ट्र के कोल्हापुर में ऑटोरिक्शा चलाते हैं। लेकिन बेटे के अंदर फुटबॉल का जुनून इस कदर है कि उन्हें पीछे नहीं हटने देता। अनिकेत जाधव ने 14 साल की उम्र में फुटबॉल की दुनिया में प्रवेश किया और 2014 में एफसी बायर्न म्यूनिख यूथ कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश और अपने मां बाप कौ गौरवान्वित किया। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की नजर पड़ने से पहले अनिकेत ने नेशनल लेवल पर कई कैप जीते हैं। अनिकेत आज के समय में कोच मातोस के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक हैं। माना जाता है कि जाधव भारत के अगले गोल मशीन हो सकते हैं।

कोमल थातल
कोमल थातल-सिक्किम में जन्मे कोमल थातल इस भारतीय टीम के प्रमुख प्लेमेकर हैं। कोमल ने ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ एक-एक गोल करके अपनी पहचान साबित की है। वे वर्तमान टीम में ऐसा करने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं।

अमरजीत कयाम-
अमरजीत कयाम- भारतीय टीम में मिडफील्डर के तौर पर खेलने वाले टीम के कप्तान अमरजीत का जन्म 6 जनवरी 2001 को मणिपुर के थऊबाल में हआ। उनकी पसंदीदा टीम है बार्सिलोना। अमरजीत सिंह की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हे कप्तान किसी और ने नहीं बल्कि खुद टीम के खिलाड़ियों ने चुना है।

संजीव स्टालिन-
संजीव स्टालिन- बेंगलुरू में जन्में संजीव को डेड बॉल स्पेशलिस्ट माना जाता है। खुद संजीव का मानना है कि उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं होता है। टूर्नामेंट से पहले खुद डिफेंडर संजीव स्टालिन कहते हैं कि ऐसा कोई भी दबाव जो मुझे मेरी क्षमता से बेहतर करने को प्रेरित करता है वह अच्छा है। मैं हमेशा ही फीफा अंडर 17 विश्व कप में खेलना चाहता था।

अनवर अली-
अनवर अली- अनवर अली पर कोच मातोस की निगाहें इसी साल मार्च में पड़ीं। अनवर की मिनर्वा एकेडमी ने इसी साल मार्च में भारत की नेशनल टीम को 1-0 से हराया था। इस मैच में अनवर हीरो रहे थे। जिसके बाद कोच ने उन्हें अप्रैल में टीम में शामिल करने का फैसला किया।

फुल स्क्वाड (टीम)
गोलकीपरः धीरज सिंह, प्रभुसुखान गिल, सनी धालीवाल।
डिफेंडर्सः बोरिस सिंह, जितेंद्र सिंह, अनवर अली, संजीव स्टालिन, हेंड्री एंटोनी, नमित देशपाण्डेय।
मिडफील्डर्सः सुरेश सिंह, नथोइनगांबा मीतेई, अमरजीत सिंह कियाम, अभिजीत सरकार, कोमल थाटल, लालेंगमाविया, जैकसन सिंह, नोंगदंबा नाओरेम, राहुल कैनोली प्रवीण, मोहम्मद शाहजहां।
फॉरवर्ड्स: रहीम अली, अनिकेत जाधव।


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