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FIFA World Cup 2018: ज्लाटन के बिना भी युनाइटेड है स्वीडन, लेकिन फॉर्म चिंता का विषय

नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप शुरू होने में बेहद कम समय बचा है। ऐसे में सभी टीमें अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर कर रही हैं। 14 जून से शुरू होने वाले इस महामुकाबले का फाइनल 15 जुलाई को रूस की राजधानी मॉस्को में खेला जाएगा। इस विश्वकप महामुकाबले में 32 टीमें हिस्सा लेंगी और उनके बीच 64 मुकाबले खेले जाएंगे। विश्वकप का आयोजन इस बार रूस कर रहा है, जिसके 11 शहरों में मैच खेले जाएंगे और फाइनल मुकाबला राजधानी मॉस्को के लुजनिकी स्टेडियम में खेला जाएगा। इस बार विश्वकप में 32 टीमों को 4-4 के आठ अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया। हर ग्रुप से चोटी की दो टीमें सीधे नॉकआउट स्टेज में जाएंगी। फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले 11 और 12 जुलाई को खेले जाएंगे।

वहीं खिताबी जंग 15 जुलाई को होगी। पिछली बार की चैंपियन जर्मनी को इस बार भी फेवरेट माना जा रहा है इसके अलावा रिकॉर्ड 5 बार की चैंपियन ब्राजील भी प्रमुख दावेदार है। हालांकि इन टीमों के सामने अर्जेंटीना और बेल्जियम जैसी टीमों का टैलेंटेड स्क्वॉड होगा जिससे पार पाना काफी मुश्किल माना जा रहा है। फीफा वर्ल्ड कप का पहला मैच मेजबान रूस और सऊदी अरब के बीच मास्को के लुज़्निकी में खेला जाएगा।

फीफा वर्ल्ड कप से पहले मायखेल आपको हर रोज उन 32 टीमों के बारे में बताएगा जो इस महाकुम्भ में हिस्सा ले रही हैं। आज हम बात कर रहे हैं स्वीडन की।


देशः स्वीडन

ग्रुपः F, इस ग्रुप में स्वीडन के अलावा दक्षिण कोरिया, मेक्सिको और जर्मनी भी हैं।

फिक्स्चर (मुकाबले):
स्वीडन बनाम दक्षिण कोरिया, 18 जून, 5.30PM IST (निजनी नोवगोरोड)
स्वीडन बनाम जर्मनी, 23 जून, 8.30PM IST (सोची)
स्वीडन बनाम मैक्सिको, 27 जून, 7.30 PM IST(येकेतेरिनबर्ग)

फीफा रैंकिंगः 23

पिछले वर्ल्ड कप मेंः टीम क्वालीफाई नहीं कर पाई

आखिरी बार वर्ल्ड कप मेंः 2006 (दूसरे राउंड से बाहर हो गई थी)

सबसे अच्छा प्रदर्शनः 1958 (रनर-अप)

स्टार प्लेयर: एमिल फोर्सबर्ग (आरबी लीपजिग के मिडफील्डर), विक्टर लिंडेलोफ (मैनचेस्टर यूनाइटेड के डिफेंडर), मार्कस बर्ग (अल ऐन के स्ट्राइकर)

कोच: जेन एंडर्सन


स्वीडन ने यूरोपीय क्वालिफायर समूह ए में 2006 की वर्ल्ड चैंपियन इटली को 1-0 से हराकर दूसरा स्थान हासिल करते हुए रूस का टिकट कटाया था। इस ग्रुप में फ्रांस और 2010 की रनर-अप नीदरलैंड जैसी टीमें भी शामिल थीं। स्वीडन ग्रुप में दूसरे नंबर पर रही थी। स्वीडन 2006 के बाद पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कर पाया है।

इस टीम की सफलता का श्रेय उनके बेहद अनुभवी कोच एंडर्सन को दिया जाना चाहिए। स्वीडन की टीम अब तक 11 विश्व कप टूर्नामेंटों में हिस्सा ले चुकी है, लेकिन एक भी बार खिताब तक नहीं पहुंच सकी। 1934 में पहली बार इस टूर्नामेंट को खेलने वाली स्वीडन ने यूईएफए के ग्रुप-ए में फ्रांस, नीदरलैंड्स और बुल्गारिया के बीच संघर्ष करते हुए क्वालीफायर की परीक्षा पास की। क्वालीफायर में उसने किसी तरह यूईएफए के ग्रुप-ए में नीदरलैंड्स के बाद दूसरा स्थान हासिल किया और प्लेऑफ में इटली के खिलाफ उलटफेर करते हुए फीफा विश्व कप-2018 में कदम रखा। यूरो 2016 की हार के बाद राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में पदभार संभालने के बाद, कोच एंडर्सन ने टीम को फिर से जीवंत किया।

ज्लाटन इब्राहिमोविक के बिना स्वीडन की चुनौती
स्वीडन की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी एकता। अपने स्टार खिलाड़ी ज्लाटन इब्राहिमोविक के बगैर उतरने वाली स्वीडन की टीम अधिक प्रतिस्पर्धी है। इन दिनों उसके ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों के बीच एकता साफ नजर आती है। ऐसे में इस टूर्नामेंट के लिए उसकी यह एकता सबसे बड़ी ताकत है। टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ी और कप्तान आंद्रेस ग्रैक्विस्ट नेतृत्व के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। विक्टर क्लासेन भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की कोशिश करेंगे। 2016 के यूरोपीय चैम्पियनशिप के बाद एलए गैलेक्सी स्ट्राइकर ज्लाटन ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास ले लिया। हालाकि उसके बाद विश्व कप के लिए वापसी करने की अफवाहें थीं, लेकिन बाद में स्वीडिश फुटबॉल फेडरेशन ने टीम की घोषणा करते वक्त उन्हें बकवास करार दिया था।

स्वीडन को इस निर्णय से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि वे अपने इस पूर्व स्टार स्ट्राइकर के बिना भी अधिक एकजुट और अच्छी तरह से संतुलित हैं। इसलिए, उनकी अनुपस्थिति उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएगी, लेकिन देश का प्रतिनिधित्व करते समय ज्लाटन द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड कोई झुठला नहीं सकता। हालांकि ये भी नहीं भूलना चाहिए कि टीम ने क्वालीफाइयर सफलता ज्लाटन की अनुपस्थिति में पाई है।

स्वीडन के लिए हालांकि, विश्व कप के अंतिम-16 चरण तक का सफर आसान नहीं होगा, क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए उसे विश्व चैम्पियन जर्मनी, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया जैसी टीमों के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़नी होगी। इन सभी टीमों को इस विश्व कप के लिए ग्रुप-एफ में शामिल किया गया है। स्वीडन के सेंटर-बैक विक्टर लिंडलोफ का मैनचेस्टर युनाइटेड में पदार्पण खराब रहा। इसके अलावा, एलावेस क्लब में जॉन ग्वाडेटी और टोलोउसे में ओला टोइवोनेन खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। टीम के प्रमुख गोलकीपरों में से एक रोबिन ओल्सन चोटिल हैं।


भविष्यवाणीः
स्वीडन की टीम जिस ग्रुप में है उसमें उसकी हार आसान नहीं होने वाली है। इस ग्रुप में डिफेंडिंग चैंपियन जर्मनी के अलावा मैक्सिको है जिसे दूसरे राउंड में पहुंचने के लिए जाना जाता है। हालांकि स्वीडन की टीम किस्मत से दक्षिण कोरिया के खिलाफ ग्रुप स्तर पर जीत हासिल कर सकती है, लेकिन जर्मनी और मेक्सिको के खिलाफ उसका जीत हासिल कर पाना बेहद मुश्किल सा लग रहा है।


Story first published: Monday, June 4, 2018, 11:01 [IST]
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