
शूटिंगः-
सभी राष्ट्रमंडल खेलों की बात करें तो भारत मेडल जीतने की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। और उम्मीद है कि पुरुष व महिला निशानेबाज एक बार फिर से पदक दिलाएंगे। बता दें कि पिछले खेलों में (ग्लास्गो) में भारतीय शूटर्स ने चार गोल्ड सहित सबसे ज्यादा 17 मेडल जीते थे।
इनसे होगी मेडल की उम्मीद-
मनु भाकर- 16 साल की पिस्टल शूटर मनु भाकर ने हाल ही में संपन्न हुए सीनियर और जूनियर वर्ल्डकप धूम मचाई थी। मनु से गोल्ड कोस्ट में भी गोल्ड की उम्मीद की जा रही है। हीना सिद्धू, जीतू राय, गगन नारंग, मानवजीत सिंह जैसे नाम हैं जो भारत को मेडल दिला सकते हैं।

एथलेटिक्स-
सीमा पूनिया: ग्लास्गो में रजत पदक जीतने वाली चक्काफेंक खिलाड़ी सीमा की नजरें पीले तमगे को हासिल कर अपने कॉमनवेल्थ चैप्टर का सुखद अंत करने पर होंगी। उन्होंने पिछले महीने फेडरेशन कप में 61. 05 मीटर का रिकॉर्ड बनाया था।
तेजस्विन शंकर: 19 बरस के हाई जंपर ने फेड कप में अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर करके उम्मीदें जगाई।
नीरज चोपड़ा: बीस बरस का यह भालाफेंक खिलाड़ी लंदन में कुछ महीने पहले सीनियर विश्व चैम्पियनशिप में फाइनल के लिये क्वालीफाई नहीं कर सका था। पिछले साल एशियाई चैम्पियनशिप में मिला स्वर्ण अभी तक उसके कैरियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

बैडमिंटन-
बैडमिंटन में भारत के पास हाई रैंकिंग वाले खिलाड़ी हैं। भारत के पास पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, किदाम्बी श्रीकांत जैसे गोल्ड मेडल के बड़े दावेदार हैं।
सिंधु- रियो ओलिंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट हैं।
साइना नेहवाल- पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिंप्स में कांस्य पदक जीता।
किदाम्बी श्रीकांत- पिछले साल 4 सुपरसीरीज टाइटल जीते और रैंकिंग में नंबर 2 स्थान हासिल किया।

बॉक्सिंग-
पिछली बार भारतीय मुक्केबाजों में से कोई गोल्ड नहीं जीत सका था, लेकिन इस बार भारत का दमदार दल इस कमी को पूरा कर सकता है। हालांकि सीरिंज विवाद ने बॉक्सर्स को जरूर निराश किया होगा लेकिन इससे उनके प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
एमसी मैरी कॉम- 35 वर्षीय मेरी कॉम पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेगी। पांच बार की विश्व चैम्पियन और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मेरीकाम 48 किलो में गोल्ड की दावेदार है। वह अपने पहले और आखिरी राष्ट्रमंडल खेलों को यादगार बनाना चाहेगी।
विकास कृष्णन- भारत के चार विश्व चैम्पियनशिप पदक विजेताओं में से एक विकास ने बुल्गारिया में स्ट्रांजा स्मृति टूर्नामेंट में स्वर्ण जीता था। विकास भी पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं।
अमित फांगल- एशियाई चैम्पियनशिप के कांस्य पदक विजेता अमित ने भी स्ट्रांजा टूर्नामेंट में स्वर्ण जीता था।

कुश्ती-
पिछले कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के लिए सबसे ज्यादा 5 गोल्ड के साथ इस खेल ने कुल 13 मेडल दिलाए थे। इस बार रियो ओलिंपिक की पदक विजेता साक्षी मलिक के अलावा फोगाट बहनों और पूजा ढांडा जैसी खिलाड़ी भी पदकों की बड़ी दावेदार मानी जा रही हैं।
सुशील कुमार- पिछले खेलों के स्वर्ण पदक विजेता सुशील ने विवादों से भरे दो साल के बाद वापसी की है। वह पुरूषों के 74 किलो फ्रीस्टाइल वर्ग में एक और गोल्ड जीतकर हैट्रिक लगाना चाहेंगे।
साक्षी मलिक- रियो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी ने ग्लास्गो में रजत पदक जीता था।
विनेश फोगाट- ग्लास्गो की स्वर्ण पदक विजेता विनेश रियो ओलंपिक के दौरान चोटिल हो गई लेकिन एशियाई चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता।

स्कॉश-
2014 में महिलाओं की डबल्स स्पर्धा में पहली बार भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स में स्क्वाश में स्वर्ण पदक मिला था। दीपिका पल्लीकल और जोशन्ना चिन्नप्पा एक बार फिर से भारत के लिए मेडल सुनिश्चित करने उतरेंगी। हालांकि यह देखना होगा कि क्या इन दोनों में से सिंगल में भारतो को कोई पदक दिला सकती हैं या पुरुष एकल में सौरव घोषाल!


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