For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

एक खिलाड़ी को हराओ, फ़ाइनल में पहुंचो: वर्ल्ड कप 2019

By Bbc Hindi

भारत बनाम न्यूज़ीलैंड के बीच सेमी फ़ाइनल मुक़ाबला कुछ घंटों में शुरू हो जाएगा, बशर्ते मैनचेस्टर का बदनाम मौसम बदमाशी न करे.

2019 क्रिकेट विश्व कप में संयोजन के लिहाज़ से भारतीय टीम शानदार दिखती है और अब तक के प्रदर्शन के लिहाज़ से काग़ज़ों पर भी उसका पलड़ा भारी है.

न्यूज़ीलैंड के लिए चिंता की बात यह है कि उसकी बल्लेबाज़ी कप्तान केन विलियमसन पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भर है.

न्यूज़ीलैंड के पास रॉस टेलर, मार्टिन गुप्टिल और टॉम लाथम जैसे अनुभवी और विध्वंसक बल्लेबाज़ हैं लेकिन इस विश्व कप में तीनों का बल्ला कमाल नहीं कर सका है. तीनों आमतौर पर मिलकर जितने रन बनाते हैं, इस विश्व कप में उसके सिर्फ़ 60 फ़ीसदी रन बना पाए हैं. इसकी भरपाई विलियमसन ने की है और टीम के 30.28 फ़ीसदी रन ख़ुद बना डाले हैं.

न्यूज़ीलैंड की वन मैन आर्मी

हालांकि विश्व कप में भारतीय टीम के रनों में भी 29 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सेदारी रोहित शर्मा की है. लेकिन भारत इसलिए आश्वस्त हो सकता है क्योंकि उसके कई बल्लेबाज़ रंग में हैं.

विराट कोहली भले ही शतक न बना पाए हों लेकिन चुटकियों में पचास रनों के पड़ाव तक पहुंचते रहे हैं. सलामी बल्लेबाज़ केएल राहुल ने पिछले मैच में ही शतक लगाया है. महेंद्र सिंह धोनी भले ही धीमी बल्लेबाज़ी के लिए निशाने पर लिए गए हों पर वो भी आठ मैचों में 44 के औसत से 223 रन बना चुके हैं. हार्दिक पांड्या भी अच्छे हाथ दिखा चुके हैं.

इसलिए रोहित नहीं भी चले तो भारत के पास बेचैन होने का कारण नहीं है.

बल्कि न्यूज़ीलैंड अपने बल्लेबाज़ों के फ़ॉर्म पर ज़रूर चिंतित होगा. इस विश्व कप में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले 15 बल्लेबाज़ों में विलियमसन न्यूज़ीलैंड के इकलौते खिलाड़ी हैं. जबकि शीर्ष 15 बल्लेबाज़ों में से तीन भारत के हैं. पहले पर रोहित शर्मा, नौवें पर विराट कोहली और 14वें पर केएल राहुल.

न्यूज़ीलैंड विश्व कप में अपने पिछले तीनों मैच हारा है और इन तीनों मुक़ाबलों में विलियमसन बड़ा स्कोर नहीं बना सके थे. उन्होंने क्रमश: 27, 40 और 41 रन बनाए थे.

तो गणित यह कहता है कि अगर भारतीय गेंदबाज़ विलियमसन को जल्दी जाल में फंसाकर पवेलियन भेज दें तो जीत की राह आसान हो सकती है.

तो यह कैसे किया जाए?

यह भारतीय टीम के लिए सबसे अहम सवाल है. 11 साल पहले अंडर-19 विश्व कप में जब भारत और न्यूज़ीलैंड का मुक़ाबला हुआ था तो विराट कोहली और केन विलियमसन ही कप्तान के तौर पर आमने-सामने थे.

उस मुक़ाबले में हरफ़नमौला प्रदर्शन से विराट कोहली ने टीम को जीत दिलाई थी और केन विलियमसन का विकेट भी उन्होंने ही लिया था.

सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले से पहले जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने उन्हें यह याद दिलाया तो वह बोले, "क्या सच में मैंने विकेट लिया था? ओह! मुझे नहीं पता कि क्या यह दोबारा हो सकता है."

विलियमसन को कैसे आउट किया जाए, अतीत में कई टीमें इस सवाल से जूझती रही हैं. कई टीमें उनके ख़िलाफ़ अलग-अलग प्रयोग कर चुकी हैं कुछ सफल रही हैं और कुछ नाकाम. केन विलियमसन इस समय क्रिकेट के 'फ़ैब फ़ोर' यानी शीर्ष चार खिलाड़ियों में गिने जाते हैं. बल्लेबाज़ी का कोई ऐसा पहलू नहीं है जो उनके लिए असंभव हो.

केन के खेलने का एक ही उसूल है- गेंद पर नज़रें गड़ाए रखो और देखो क्या होता है.

इसलिए विलियमसन की बतौर बल्लेबाज़ कोई विशेष कमज़ोरी अब तक उजागर नहीं हुई.

खब्बू स्पिनर के ख़िलाफ़

लेकिन विराट कोहली को यह आंकड़ा दिलचस्प लग सकता है कि बीते पांच साल में विलियमसन एक तिहाई बार लेफ्ट आर्म स्पिनर को अपना विकेट दे चुके हैं. यह तेज़ गेंदबाज़ों और दूसरी तरह के स्पिनरों के मुक़ाबले अधिक है. भारत के लेफ्ट आर्म स्पिनर रहे प्रज्ञान ओझा पांच टेस्ट मैचों में पांच बार विलियमसन को गच्चा देकर आउट कर चुके हैं.

विलियसमन को सुलेमान बेन, रंगना हेराथ, ज़ुल्फ़िकार बेन और यहां तक कि युवराज सिंह की गेंदों पर भी संघर्ष करते देखा गया है. रविंद्र जडेजा इस बात पर मुस्कुरा सकते हैं.

'द इंडियन एक्सप्रेस' में संदीप जी. ने एक विश्लेषण के ज़रिये बताया है कि विलियमसन को रणनीति के तहत कौन सी गेंदें फेंकी जानी चाहिए.

बैक ऑफ़ द लेंग्थ और धीमी गेंदें

उन्होंने लिखा है कि 'बैक ऑफ़ द लेंग्थ' यानी गुड लेंग्थ से थोड़ी छोटी गेंदें विलियमसन को परेशान कर सकती हैं. कीवी कप्तान अकसर ऐसी गेंदों को बैकवर्ड पॉइंट पर बल्ले का मुंह खोलकर खेलते हैं. लेकिन गेंद अगर अपेक्षा से थोड़ी ज़्यादा आउटस्विंग हो जाए या विलियमसन अपने शरीर से ज़्यादा दूर बल्ला ले जाएं तो किनारा लगने के आसार बढ़ सकते हैं.

विलियमसन स्पिनर्स को अच्छा खेलते हैं लेकिन गेंद टप्पा खाकर कितना उठेगी, यह भांपने में चूक जाते हैं. इससे होता यह है कि उनके पास गेंद पर शॉट लगाने का समय कम बचता है. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैच में लेग स्पिनर शादाब खा़न ने इसी का फ़ायदा उठाते हुए उन्हें आउट किया. भारत के पास एक स्पिनर है जो अपनी 'ड्रिफ्ट' और 'डिप' से बल्लेबाज़ों को चकमा देने के लिए जाना जाता है. नाम है, कुलदीप यादव.

संदीप जी ने यह भी लिखा है कि इस विश्व कप में कुछ-एक बार विलियमसन धीमी गेंदों को खेलते हुए पूरे नियंत्रण में नहीं दिखे. ख़ास तौर से धीमी ऑफ़ और लेग कटर गेंदों से ड्राइव का निमंत्रण दिए जाने पर वह कुछ अनियंत्रित से दिखे हैं और कई बार फील्डरों के हाथ में कैच थमाने से कुछ इंच से बचे हैं.

बुमराह, भुवनेश्वर और हार्दिक तीनों धीमी गेंदें फेंकने में माहिर हैं.

तो टीम इंडिया का मक़सद यही होगा कि विलियमसन को लय में आने से पहले रोकें. विलियमसन के बाद लोकी फ़र्ग्यूसन की गेंदबाज़ी से बचना होगा लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ उसमें सक्षम दिखते हैं.

Story first published: Tuesday, July 9, 2019, 12:28 [IST]
Other articles published on Jul 9, 2019
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+