Tokyo 2020: मेडल से बस एक जीत दूर बजरंग पुनिया, 65kg वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाई

टोक्यो: रेसलिंग में भारत के गोल्ड मेडल की बड़ी उम्मीद बजरंग पुनिया सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। पुनिया ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल में पहले दौर में फीकी जीत दर्ज करने के बाद क्वार्टरफाइनल मुकाबले में 2-1 से प्रतिद्वंदी को मात देकर अंतिम चार में जगह बनाई और अब मेडल की दावेदारी बहुत मजबूत हो गई है।

भारत के बजरंग पुनिया का मुकाबला 1/8 में किर्गिस्तान के एर्नाजर अकमातालिव से हुआ और वे पहले राउंड के बाद 3-1 से आगे चल रहे थे। हालांकि, अकमातालिव ने दूसरे दौर में बजरंग को दो बार सीमा से बाहर धकेल कर वापसी की। बजरंग किसी तरह अंतिम आठ सेकंड का सफलतापूर्वक बचाव करने में सफल रहे, इस प्रकार स्कोरलाइन 3-3 हो गया और पुनिया को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर जीत मिल गई।

हालांकि बजरंग ने अपनी पहली बाउट जीती, लेकिन यह एक आसान प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ एक ठोस जीत नहीं थी। अब उन्हें पदक की उम्मीदों को जिंदा रखना था तो क्वार्टर में दम दिखाने की दरकार थी।

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पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा क्वार्टर फाइनल में बजरंग पुनिया का सामना ईरान के मुर्तजा घियासी चेका से हुआ। ईरानी पहलवान ने मैच में अपना खाता खोला और पहला राउंड खत्म होने के बाद पुनिया 0-1 से पिछड़ रहे थे। लेकिन यहां पर बजरंग ने वही काम किया जो टोक्यो ओलंपिक 2020 के सिल्वर मेडलिस्ट रेसलर रवि कुमार ने किया था। उन्होंने अपने विपक्षी को पिन करके यह मुकाबला जीत लिया। इसके साथ ही उनकी सेमीफाइनल में एंट्री पक्की हो गई।

बजरंग पुनिया का सेमीफाइनल मुकाबला आज दोपहर (करीब 2 बजकर 50 मिनट) अजरबैजान के हाजी अलीयेव से होगा। बजरंग टोक्यो खेलों में कुश्ती दल से भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीदों में से एक है। उन्होंने 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता और फिर 2019 विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। बाद के परिणाम ने उन्हें टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई करने में मदद की।

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बजरंज इस ओलंपिक में तीसरे भारतीय पहलवान हैं जो सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। उनसे पहले रवि कुमार दहिया और दीपक पुनिया ऐसा कर चुके हैं।

वैसे भारत के लिए टोक्यो 2020 में रेसलिंग का अनुभव खट्टा-मीठा रहा है। रवि किशन ने 57 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता और वे सुशील कुमार के बाद ऐसे दूसरे भारतीय बने, लेकिन बाकी पहलवानों से निराश किया। दीपक पुनिया को मेडल जीतने का भरपूर मौका मिला लेकिन वे सेमीफाइनल के बाद कांस्य पदक मुकाबला भी हार गए।

मेडल की बहुत बड़ी उम्मीद विनेश फोगाज ने क्वार्टरफाइनल का ही सफर तय किया, जबकि अंशु मलिक ना केवल पहले राउंड से बाहर हुईं बल्कि रेपचेज में भी पहला मैच हारीं। वे निराशा साबित हुईं। आज 6 अगस्त को भी भारत की सीमा बिसला पहले ही दौर में बाहर हो गईं। बजरंग से अब बड़ी उम्मीदें रहेंगी। भारत इस ओलंपिक में 5 मेडल ले चुका है, लेकिन एक बार फिर से गोल्ड की रेस के नजदीक हम कभी नहीं दिखे हैं।

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Story first published: Friday, August 6, 2021, 10:32 [IST]
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