अपने वेट से डबल वजन उठाने वाली मीराबाई चानू ने पहले ही बता दिया था- इस बार मेडल पक्का है

टोक्यो: मीराबाई चानू ने कमाल कर दिया है, उन्होंने वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक सिल्वर मेडल लाकर देश की पहली महिला बनने का गौरव हासिल किया है। इससे पहले 2000 में हुए सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ऐसी पहली भारतीय महिला बनी थीं जिन्होंने वेटलिफ्टिंग में पदक जीता था। वह कांस्य पदक था। मीराबाई ने 49 किलो भार वर्ग में ये पदक जीता है। वे टोक्यो ओलंपिक में भारत की एकमात्र वेटलिफ्टर हैं।

टोक्यो ओलंपिक बड़े मंच पर मीराबाई चानू की दूसरी ओलंपिक प्रतियोगिताहै। 2016 में, उन्होंने रियो के लिए क्वालीफाई किया, लेकिन क्लीन एंड जर्क श्रेणी में तीन प्रयासों में किसी भी वैध लिफ्ट को नहीं बना सकीं। उनका कहना था कि पहले ओलंपिक में वे नर्वस थीं। तब से लेकर उनकी अब तक की यात्रा जबरदस्त रही है। 2017 में, उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और एक साल बाद राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और 2019 एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।

पुराने गम भुलाकर पूरे देश की प्रेरणा बनीं मीराबाई-

पुराने गम भुलाकर पूरे देश की प्रेरणा बनीं मीराबाई-

मीराबाई चानू स्नैच में 84 किलोग्राम व 87 किलोग्राम वजन उठाया और फिर क्लीन एंड जर्क में 110 किलोग्राम और 115 किलोग्राम वजन उठाया। दोनों ही श्रेणियों में उठाए गए उच्चतम वजन के आधार पर उनके कुल अंक 202 बने जिन्होंने मीराबाई को सिल्वर मेडल दिलाने में कामयाबी हासिल की। नंबर एक स्थान पर रहीं चीन की जे होउ (210), जबकि इंडोनेशिया की कांतिका विंडी (194) को ब्रांज मिला।

मीराबाई की इस उपलब्धि ने ओलंपिक 2016 का गम भी पुरानी बात कर दिया है। उम्मीदें तो उनसे रियो ओलंपिक खेल में भी बहुत ऊंची थी लेकिन वे केवल 1 स्नैच ही सही से कर पाईं और बाकी सबमें फेल हो गईं। उनकी लिफ्टिंग को डिश क्वालीफाई कर दिया गया और मीराबाई के सामने 'डिड नॉट फिनिश' का टैग लगा दिया गया। यह एक डेब्यूटेंट के लिए काफी बुरी ओलंपिक शुरुआती थी वे सारा दिन अपने रूम में जाकर रोती रहीं। रियो ओलंपिक से टोक्यो ओलंपिक तक का उनका सफर बहुत शानदार है लेकिन कठिनाइयों भरा रहा है।

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अमेरिका में ट्रेनिंग करना काम कर गया-

अमेरिका में ट्रेनिंग करना काम कर गया-

साल 2018 का अधिकांश समय ऐसा था जब वे चोटों से जूझती रहीं। उनको कंधे और लोअर बैक के हिस्से में चोट लगी। लेकिन मीराबाई भारत के मेडल के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण थी इसी के चलते देश के खेल नीति नियंताओं ने मीराबाई पर पूरे कॉन्फिडेंस के साथ इन्वेस्ट किया। उनको अमेरिका में टॉप लेवल के स्ट्रैंथ एंड कंडीशनिंग कोच के पास भेजा गया।वे सेंट लुइस में रहीं और इस दौरान उनके साथ भारत के नेशनल कोच विजय शर्मा, सहायक कोच संदीप कुमार और फिजियोथेरेपिस्ट अलाप जावेडकर थे।

इतना ही नहीं मीराबाई के लिए फ्लाइट का इंतजाम भी अमेरिका से सीधा जापान कराया गया ताकि उनके लिए क्वॉरेंटाइन करना आसान रहे। भारत से जाने वाले एथलीटों के लिए सख्त क्वॉरेंटाइन का प्रावधान है।

लॉकडाउन में अपनी तकनीक सुधारने पर काम किया-

लॉकडाउन में अपनी तकनीक सुधारने पर काम किया-

मीराबाई के सामने मेडल लाने में एक और बड़ी बाधा स्नैच था जिसने उनको हमेशा परेशान किया और वे क्लीन एंड जर्क जैसी थोड़ी कम तकनीक वाली लेकिन अधिक पावर वाली लिफ्टिंग में बेहतर थीं। उन्होंने लॉकडाउन 2020 में अपनी तकनीक में छुपी सभी खामियों पर काम किया। मीराबाई ने कुछ दिनों पहले ही बता दिया था कि वह टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतने जा रही हैं क्योंकि वे प्रेशर को हैंडल करना कहीं बेहतर तरीके से सीख चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि क्लीन एंड जर्क में भी अपनी तकनीक पर भी उन्होंने बहुत काम किया।

बखूबी उठा लिया करोड़ो देशवासियों की उम्मीदों का भार-

बखूबी उठा लिया करोड़ो देशवासियों की उम्मीदों का भार-

मीराबाई का दिन अपने वेट से डबल वजन उठाने के साथ शुरू होता है। अपने कोच और साथियों के द्वारा प्यार से मीरा कहीं जाने वाली है इस एथलीट ने ओलंपिक बारबेल के साथ-साथ करोड़ों देशवासियों की उम्मीदों के भार को भी बखूबी उठाने में सफलता हासिल करके दिखा दी। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए मीराबाई चानू को बधाई।

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Story first published: Saturday, July 24, 2021, 14:47 [IST]
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