BBC Hindi

जब पाकिस्तानी को ख़ून देने के लिए तैयार थे बिशन सिंह बेदी

Posted By: BBC Hindi
बिशन सिंह बेदी

'मेरा ब्लड ग्रुप असल में है जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल, अगर आपको सूट करता है तो ले लो.'

'ये बात ख़बर बन गई और चारों तरफ़ फैल भी गई.'

'जनरल जिया ने ख़ुश होकर एक बड़े फ्लोर का कालीन और चांदी की तश्तरी मुझे दी.'

ये बात क़िस्से के रूप में बुधवार की रात को भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज लेग स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में कही.

बिशन सिंह बेदी और उनकी कप्तानी में भारत और दिल्ली के लिए खेल चुके बल्लेबाज़ मोहिन्दर अमरनाथ के नाम पर फ़िरोज़शाह कोटला में स्टैंड के नाम रखे गए और इसी आयोजन में बेदी ने ये क़िस्सा सुनाया.

पाकिस्तानी बच्चों को दिया ख़ून

पूरी कहानी ये है कि संन्यास लेने के बाद एक बार विश्व एकादश के लिए बिशन सिंह बेदी वेस्ट इंडीज़ के रोहन कन्हाई की कप्तानी में पाकिस्तान खेलने गए.

वहीं डॉन अख़बार में उन्होंने पढ़ा कि पेशावर के कुछ बच्चों को ख़ून की ज़रूरत है. इत्तेफ़ाक़ से बेदी का ब्लड ग्रुप उनसे मिलता था. बेदी ने अस्पताल फ़ोन कर कहा कि अगर आपको हिंदुस्तानी लहू से कोई एतराज़ नहीं है तो आप ख़ून लेकर जा सकते हैं.

उसके बाद अस्पताल वाले बेदी के पास पहुंचे और बहुत आभार जताया. लेकिन बेदी ने कहा कि मुझे कोई वाह-वाही या पब्लिसिटी नहीं चाहिए बल्कि मैं ख़ून इसलिए दे रहा हूं क्योंकि मैं रेगुलर डोनर हूं.

लोढ़ा पैनल 50 साल पहले बनना चाहिए था: बेदी

फिर दोनों देश एकदूसरे के ख़ून के प्यासे क्यों?

इसके बाद अस्पताल वाले बार-बार बिशन सिंह बेदी से कहने लगे कि क्या आपका ब्लड ग्रुप यही है, वाक़ई यही है. तब बेदी ने कहा, "नहीं, असल में मेरा ब्लड ग्रुप है जॉनी वॉकर ब्लैक लेवल. अगर आपको सूट करता है तो ले लो."

बिशन सिंह बेदी के इतना कहते ही एक ठहाका गूंज उठा. बेदी ने आगे कहा कि इस घटना की चर्चा के बाद सारे पाकिस्तान ने अपनी मोहब्बत उनपर लुटा दी.

बेदी से ना तो किसी टैक्सी वाले ने किराया लिया और ना ही किसी दुकानदार ने ख़रीदारी के पैसे लिए. आख़िरकार में उन्हें कहना पड़ गया कि 'आप लोग एक ख़ून की बोतल का इतना मान दे रहे हो तो हम इस ख़ून के प्यासे क्यों हैं. क्या हम एक दूसरे को ख़ून का दान नहीं कर सकते.'

क्रिकेट की सुनहरी यादों की एक शाम

पाकिस्तान से जुड़े कई किस्से

इसके बाद बेदी ने एक और क़िस्सा सुनाया कि एक बार स्कॉच की 28 बोतल वे लाहौर ले गए.

बेदी ने कहा कि लाहौर में कस्टम ऑफ़िसर एक लडकी थी. उसने बेदी से कहा कि तुआनू पता नहीं ऐथे निज़ामे मुस्तफ़ा लगा है. बेदी ने जवाब में कहा कि बीबी मैनू पता पर तैनू नी पता कि मेरे यार कितने प्यासे नै.

उस कस्टम ऑफ़िसर लडकी ने कहा कि मैं आपको जाने नहीं दूंगी. तब बेदी ने कहा कि आप मुझे डिटेंशन स्लिप दे दो. मैं इन बोतल को लाहौर से कराची ले जाउँगा. ख़ैर उसने डिटेंशन स्लिप बेदी को दी और आधे घंटे बाद लाहौर में बेदी के उतरने के बाद सभी पाकिस्तानी सरदारों की बोतलें रोक दी गई.

उसके एक सप्ताह बाद बेदी कराची पहुंचे. वहां कस्टम वालों को पहले से ही बता दिया गया था कि एक सरदार यहां से आएगा, वह हरी बत्ती से गुज़रेगा, उसे कोई नहीं रोकेगा. उस समय पाकिस्तानी हॉकी टीम के कप्तान इस्लाहुद्दीन कस्टम विभाग के अधिकारी थे.

जब बेदी पाकिस्तानी टीम पर हुए नाराज़

बेदी ने पाकिस्तान से जुड़ी एक कहानी और सुनाई. उन्होंने कहा कि एक बार भारत को वनडे मैच में जीत के लिए कुछ 20 रनों की ज़रूरत थी और छह विकेट बाक़ी थे. उसके बाद पाकिस्तान गेंदबाज़ों ने फ़ैसला किया कि वह बल्लेबाज़ों की पहुंच से बाहर बाउंसर करेंगे.

गेंदबाज़ भी इमरान खान और सरफराज़ नवाज़ थे. कमाल की बात है कि यह सब बेदी के साथ या ख़िलाफ़ काउंटी क्रिकेट खेल चुके थे. ऐसे में बेदी ने खिलाड़ियों को यह कहकर वापस बुला लिया कि अगर रोने वाली क्रिकेट ही खेलनी है तो क्या फ़ायदा.

तब भारत के ड्रेसिंग रूम में कर्नल नसीम पहुंचे और बेदी से कहा का चलो खेलों. मगर नाराज़ बेदी ने कहा कि किससे खेले. तब नसीम ने कहा कि अच्छा ऐसा करो कि विश्वनाथ की जगह किसी लम्बे बैट्समैन को भेज दो.

कमाई कितनी, कि आराम नहीं करते क्रिकेटर?

द्रविड़ बने मेंटर तो टूट गया पीटी ऊषा का रिकॉर्ड!

बेदी ने जवाब में कहा कि मै अपना बैटिंग ऑर्डर बदल लूं लेकिन आप अपनी हरकतें नहीं चेंज करेंगे. बेदी इतना नाराज़ थे कि उन्होंने टीम मैनेजर महाराजा बड़ौदा से कहा कि प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से कहो कि वह टीम को वापस बुला ले.

बेदी का कहना था कि यह गुडविल टूर क्या एकतरफ़ा होगा.

बेदी ने जनरल ज़िया को हंसाया

इसके बाद एक मैच इस्लामाबाद में हुआ जिसमें बेदी नहीं खेले. सुनील गावस्कर टीम के कप्तान बने. तीन दिन का मैच था और किसी बात पर गावस्कर और सरफराज़ नवाज़ के बीच बहस हो गई. यहां तक कि ग़ाली-ग़लौच भी हुई.

गावस्कर ने फ़ैसला कर लिया कि पारी समाप्ति का एलान करना ही नहीं है. मैच ड्रा रहा लेकिन पाकिस्तानी मीडिया में बात छा गई कि यह टीम रोंदू है. यह क्रिकेट खेलने नहीं आई है. मैच समाप्त होने के बाद जनरल ज़िया के साथ एक आधिकारिक डिनर था. जनरल ज़िया को बता दिया गया था कि भारतीय टीम ने क्या किया है.

जनरल ज़िया अपने आप में सिमटे रहने वालों में से एक थे. सारी टीम एक लकड़ी के फ्लोर पर लाइन में खड़ी थी. जनरल ज़िया थोड़ी देर में लैदर शूज़ पहने टक-टक-टक की आवाज़ के साथ पहुंचे और बेदी के पास बिना किसी सलाम दुआ के बोले-बेदी साहब. आपने डिक्लेयर क्यों नहीं किया आज. बेदी ने कहा कि जनरल मैं तो मैच ही नहीं खेला, आप मुझसे कैसे डिक्लेयर की उम्मीद कर सकते हैं.

जनरल जिया ने कहा ओह—नो-नो-नो. अगर मैं भारत का कप्तान होता तो मैं 12 बजे टीम डिक्लेयर कर देता. इतना कहकर वह थोड़ा आगे बढ़े. उन्होंने दो-तीन खिलाड़ियों से हाथ भी मिलाया. तभी बेदी ने सोचा चलों देखे तो सही. बेदी ने कहा एक्सक्यूज़ मी जनरल. मुझे नहीं लगता कि आप 12 बजे डिक्लेयर कर सकते थे. इसकी ज़िम्मेदारी पूरी तरह से मुझे दी गई थी.

इसके बाद जनरल ज़िया बहुत ज़ोर से हसें. बहुत ज़ोर से और लोग हैरान-परेशान कि यह बंदा तो कभी हंसा ही नहीं. इसके बाद मीडिया ने बेदी से कहा कि आपने जनरल को क्या कहा. आपने उन्हें कैसे हंसा दिया. बेदी ने कहा मैंने कुछ ख़ास नहीं कहा बस इतना कहा था कि 'जनरल सरदार बनना ई.'

BBC Hindi
Story first published: Friday, December 1, 2017, 21:36 [IST]
Other articles published on Dec 1, 2017
Please Wait while comments are loading...