
विराट की अगुवाई में एक और साल-
विराट कोहली की अगुवाई में भारतीय टीम ने इस साल भी बेहतर खेल दिखाया हालांकि वह आईसीसी प्रतियोगिताओं में हारती रहे लेकिन आस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट जीत भी इसी साल में ली थी। जबसे महेंद्र सिंह धोनी ने 2018 में सफेद बॉल क्रिकेट की कप्तानी छोड़ी तो कोहली भारतीय क्रिकेट के बेताज बादशाह बन गए। तब बीसीसीआई के पास बहुत मजबूत प्रशासन नहीं होता था और कोहली ही जैसे भारतीय क्रिकेट में फैसले लेते थे। यह स्थिति तब तक रही जब तक दुनिया के सबसे ताकतवर क्रिकेट बोर्ड ने साल 2019 के अंत तक आते-आते सौरव गांगुली जय शाह को अपनी टॉप की पोस्ट पर बैठा दिया।
गांगुली और कोहली तो आपस में टक्कर की शख्सियत थी और दोनों ने ही बहुत दिमाग के साथ काम चलाते हुए आपस में एक दूसरे के रास्तों में ना टकराने का फैसला किया। इस दौरान कोहली और शास्त्री की जोड़ी भारतीय क्रिकेट टीम पर प्रभुत्व करती रही जबकि सौरव गांगुली पर्दे के पीछे इस देश में क्रिकेट को आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे।
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बोर्ड का चेहरा बदला, विराट का रुतबा बदला-
लेकिन भारतीय क्रिकेट बोर्ड और कोहली के बीच में एक हल्की दरार तब दिखाई दी जब 2020 के क्रिकेट वर्ल्ड कप से पहले विराट ने T20 कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। तब विराट ने घोषणा की थी कि वे वनडे और टेस्ट क्रिकेट में कप्तानी जारी रखेंगे और फिर भारतीय टीम T20 वर्ल्ड कप खेली जहां पर उसको लीग मुकाबलों में ही बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के चयनकर्ताओं ने विराट को 50 ओवर की कमान से हटाकर एक ऐसा फैसला किया जिसके बारे में किसी ने कल्पना नहीं की थी। इतना ही नहीं इस फैसले के बाद विराट कोहली और सौरव गांगुली के बीच में मिसअंडरस्टैंडिंग भी निकल कर सामने आई।

रोहित के साथ शेयर करनी होगी स्पॉटलाइट-
विराट कोहली की शख्सियत ऐसी है कि वह स्पॉटलाइट में रहने के आदी हो चुके हैं लेकिन अब उनको इसका आधा हिस्सा भारत के नए सफेद बाल कप्तान रोहित शर्मा के साथ शेयर करना होगा। कोहली के नाम भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 70 के करीब शतक है लेकिन पिछले 2 साल से उनका बल्ला खामोश है और जो उन्होंने अपने उच्च स्टैंडर्ड सेट किए थे उसके हिसाब से आज विराट कुछ भी नहीं है।
अब बीसीसीआई के साथ भी उनके तकरार सामने आने लगी है और कोहली के लिए चीजों को फिर से वापस करना आसान नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उनको कमान सौंपी हुई है लेकिन अब रवि शास्त्री भी टीम मैनेजमेंट में नहीं है और ना ही वह सहायक कोच है जो विराट और शास्त्री के इशारों पर हां में हां मिलाया करता था। अब भारतीय क्रिकेट टीम के पास राहुल द्रविड़ जैसे मजबूत शख्सियत वाला कोच है तो जाहिर है विराट कोहली को अगर पुराना रुतबा हासिल करना है तो उनको एक बल्लेबाज के तौर पर फिर से खुद को बेस्ट साबित करके दिखाना होगा।

टेस्ट में अभी भी बहुत कुछ हासिल करने का मौका-
यह बात सच है कि भारत को साल की शुरुआत में आस्ट्रेलिया के खिलाफ एक ऐसी महान जीत मिली जिसकी चर्चा आने वाले सालों में भी की जाती रहेगी लेकिन यह भी सच है कि विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहले टेस्ट मैच के बाद ही अपने बच्चे के जन्म के लिए घर वापस आ गए थे और टीम की कमान अजिंक्य रहने ने बेहद मुश्किल समय में संभाली थी।
कोहली ने बाद में कप्तान के तौर पर वापसी की और वे इंग्लैंड में एक और ओवरसीज सीरीज जीतने की कगार पर थे लेकिन तब टीम में कोरोनावायरस के चलते भारतीय सीनियर खिलाड़ी पांचवां मैच ना खेलने की जिद में आ गए और तुरंत ही इंग्लैंड को छोड़ने का फैसला कर लिया। भारत पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में फिलहाल 2-1 से आगे चल रहा है और अगले साल अंतिम टेस्ट मुकाबला खेला जाना बाकी है। अगर भारत यह मुकाबला जीतने में कामयाब रहता है और मौजूदा दक्षिण अफ्रीका दौरे पर भी जीतने में कामयाब रहता है तो कोहली ऐसे पहले एशिया कप्तान बन जाएंगे जिन्होंने इंग्लैंड साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में जाकर टेस्ट सीरीज जीती है।


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