5 क्रिकेटर्स जिन्होंने संन्यास के बाद संभाली देश की कमान, बने प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। हर खेल की तरह क्रिकेट के खेल में भी खिलाड़ी एक तय उम्र तक ही इसका लुत्फ उठा सकते हैं और अपने देश के लिये सेवायें दे पाते हैं। ऐसे में क्रिकेट के इतिहास में कई बार देखा गया है कि कुछ खिलाड़ी समय से पहले टीम से बाहर हो जाते हैं और मौका न मिलने पर संन्यास का ऐलान कर देते हैं तो वहीं कई खिलाड़ी 36-40 के बीच संन्यास का ऐलान करते हैं। इस दौरान कई ऐसे भी खिलाड़ी देखने को मिलते हैं जिन्होंने नाम मात्र के लिये क्रिकेट में कदम रखा हो। बतौर क्रिकेटर एक खिलाड़ी अपने देश की जनता से जुड़ता जिसका फायदा वह संन्यास के बाद के करियर में भी उठाता है।

और पढ़ें: अगर 70 के दशक में होता आईपीएल तो इस खिलाड़ी पर जमकर बरसता पैसा

अक्सर संन्यास के बाद खिलाड़ी कॉमेंटेटर, कोच या किसी बोर्ड के कामों से जुड़ते हुए दिखाई देते हैं लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे भी क्रिकेटर हुए हैं जिन्होंने खेल के मैदान पर दम दिखाने के बाद राजनीति के मैदान पर दम दिखाया और आगे चलकर अपने देश की कमान संभाली और प्रधानमंत्री बनें। आइये आज उन 5 क्रिकेटर्स के बारे में बात करें जो संन्यास के बाद अपने देश के प्रधानमंत्री बनें।

और पढ़ें: कोरोना वायरस के चलते गई एक और दिग्गज क्रिकेटर की जान, आनन-फानन में दफनाया

इमरान खान (Imran Khan, Pakistan)

इमरान खान (Imran Khan, Pakistan)

इस फेहरिस्त में सबसे पहला और सबसे ताजा नाम पाकिस्तान क्रिकेट टीम के महान कप्तान और हरफनमौला खिलाड़ी इमरान खान का है, जिनकी लीडरशिप में पाकिस्तान की टीम ने 1992 का वनडे विश्व कप जीता था। इमरान खान का क्रिकेट करियर काफी शानदार रहा है, न सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर बल्कि एक कप्तान के रूप में भी वह आजतक पाकिस्तान के युवाओं के लिये आदर्श बनें हुए हैं। विश्व कप जीतने के महज 6 महीने बाद ही इमरान खान ने क्रिकेट के हर प्रारूप से संन्यास ले लिया और फिर राजनीति में कदम रखा। करीब 26 सालों की मेहनत के बाद इमरान खान साल 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन गये।

सर एलेक डगलस होम (Alec Douglas-Home, Britain)

सर एलेक डगलस होम (Alec Douglas-Home, Britain)

इस मजेदार लिस्ट में दूसरा नाम क्रिकेट को जन्म देने वाले देश इंग्लैंड से है। क्रिकेट इतिहास में इंग्लैंड ने कई बड़ खिलाड़ी दिये, इतना ही नहीं यहां पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा भी खिलाड़ियों ने काउंटी क्रिकेट खेलकर अपना नाम कमाया है। इसी फेहरिस्त में एक नाम है सर एलेक डगलस होम का जिन्होंने अपने करियर के दौरान काउंटी टीम मिडिलसेक्स और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिए क्रिकेट खेला।

इस दौरान उन्होंने साल 1924-1927 के बीच 10 फर्स्ट क्लास मैच खेले और 16.33 की औसत से 147 रन बनाए। वह अपनी टीम के लिये बेहतरीन घरेलू क्रिकेटर रहे, हालांकि वह अपने क्रिकेट करियर को आगे न बढ़ा सके और जल्द ही राजनीति में कदम रखा। आगे चलकर डगलस1963 से 1964 के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के पद पर कार्यरत रहे।

सर फ्रांसिस बेल (Sir Francis Bell, New Zealand )

सर फ्रांसिस बेल (Sir Francis Bell, New Zealand )

इंग्लैंड की ही तरह न्यूजीलैंड का क्रिकेट का इतिहास भी काफी पुराना है और इस फेहरिस्त में अगला नाम न्यूजीलैंड में काफी कम समय के लिये प्रधानमंत्री रहे सर फ्रांसिस बेल का है। फ्रांसिस बेल न्यूजीलैंड में जन्में पहले ऐसे नागरिक थे जिसने देश की बागडोर संभाली, हालांकि उनके हाथ यह बागडोर महज 20 दिन ही रही लेकिन इस बीच उनका नाम न्यूजीलैंड का नाम बतौर प्रधानमंत्री शुमार हो गया। एक राजनेता बनने से पहले फ्रांसिस ने क्रिकेट में भी अपने करियर को आजमाया था और वेलिंगटन के लिये 2 फर्स्ट क्लास मैच खेलने के बाद उन्होंने इसे अलविदा कह दिया था।

नवाज शरीफ (Nawaj Shareef, Pakistan)

नवाज शरीफ (Nawaj Shareef, Pakistan)

इस फेहरिस्त में अगला नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का है। आप में से कई लोग यह नाम देखकर चौंक गये होंगे, हालांकि यह सच है कि नवाज शरीफ राजनीति में कदम रखने से पहले एक क्रिकेटर बनने की इच्छा रखते थे और इसको लेकर उनकी गंभीरता इसी बात से पता चलती है कि उन्होंने पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट में फर्स्ट क्लास मैच खेला है। हालांकि नवाज शरीफ का क्रिकेट करियर उनके राजनीतिक करियर से काफ उलट रहा। अपने इकलौते फर्स्ट क्लास मैच के दौरान नवाज बिना खाता खोले आउट हो गये थे, जिसके बाद उन्होंने कभी भी खेल के मैदान की तरफ रुख नहीं किया। हालांकि क्लब क्रिकेट में उन्होंने में काफी रन बनाये।

कामिसेसे मारा (Kamisese Mara, Fize)

कामिसेसे मारा (Kamisese Mara, Fize)

इस फेहरिस्त में आखिरी नाम फिजी क्रिकेट टीम से है जिसका मौजूदा समय में कोई खास अस्तित्व नहीं है। 1953-54 के दशक में फिजी किकेट के लिये कामिसेसे मारा नाम के खिलाड़ी हुए जिन्होंने करियर में क्लब क्रिकेट के अलावा 2 फर्स्ट क्लास मैचों में भी शिरकत की। हालांकि 1953-54 के दौरान उनके हाथ में चोट लग गई और वह फिर कभी दोबारा क्रिकेट नहीं खेल सके।

क्रिकेट को अलविदा कह चुके फिजी के खिलाड़ी ने फिर राजनीति में कदम रखा और काफी कामयाब रहे। वह फिजी के लिये साल 1970 से 1992 तक प्रधानमंत्री के पद पर कार्यरत रहे और आगे चलकर साल 2000 तक देश के राष्ट्रपति भी बनें।

For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

Story first published: Wednesday, June 3, 2020, 19:12 [IST]
Other articles published on Jun 3, 2020
POLLS
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Yes No
Settings X