
जायज है जडेजा को खिलाने का फैसला
सोशल मीडिया पर अश्विन को टीम में खिलाने की बात करने वाला हर व्यक्ति एक बात को समझ नहीं पा रहा है कि किस खिलाड़ी की जगह प्लेइंग 11 में अश्विन को शामिल किया जाये। कुछ लोगों का मानना है कि जडेजा की जगह अश्विन को मौका दिया जाना चाहिये हालांकि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि जडेजा को 5वें नंबर पर प्रमोट किया जाना एक सोचा समझा और सही कदम है। सीरीज की बात करें तो जडेजा ने रॉरी बर्न्स और अजिंक्य रहाणे से ज्यादा समय क्रीज पर बिताया है और भारत के टॉप 4 में शामिल बल्लेबाजों से ज्यादा औसत से बल्लेबाजी की है तो अश्विन से ज्यादा जडेजा ने हनुमा विहारी को टीम से बाहर रखा है।
सवाल यह कभी भी नहीं रहा है कि क्या रविंद्र जडेजा की तुलना में अश्विन ज्यादा विकेट हासिल कर सकते हैं, क्योंकि जवाब एकदम साफ है कि जी हां क्यों कि वह उनसे बेहतर स्पिन गेंदबाजी हैं। सवाल यह रहा है कि क्या अश्विन टीम के चौथे सीमर गेंदबाज की तुलना में ज्यादा विकेट हासिल कर सकेंगे क्योंकि यह जडेजा नहीं है जो उन्हें टीम से बाहर रख रहे हैं बल्कि टीम के चौथे सीमर की वजह से वह प्लेइंग 11 में जगह नहीं बना पा रहे हैं।

टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल ने बदली है सोच
दरअसल इसका जवाब विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल से नजर आता है जिसका असर इस सीरीज पर नजर आ रहा है। विराट कोहली के पास इस फाइनल मैच में आईसीसी खिताब जीतने का सबसे अच्छा मौका था जिसमें कप्तान ने 3 सीमर और 2 स्पिनर्स के साथ जाने का फैसला किया जबकि परिस्थितियां 4 सीम गेंदबाजों के हक में थी। फाइनल के लिहाज से अश्विन ने शानदार गेंदबाजी की लेकिन खिताब न मिल पाने की वजह से टीम मैनेजमेंट को लगा कि उन्होंने टीम के चयन में गलत खिलाड़ी का चयन किया।
इसी के चलते यह सीरीज गेंदबाजों को पहले प्राथमिकता देते हुए नजर आयी है। हेडिंग्ले टेस्ट को छोड़ दें तो भारतीय टीम ने हर टॉस के बाद गेंदबाजी को ही प्राथमिकता दी है, जो कि दर्शाता है कि परिस्थितियां 4 सीमर गेंदबाजों के पक्ष में ही नजर आयी हैं।

3 सीमर खिलाने पर कप्तान को होती यह दिक्कत
वहीं गेंदबाजों की बात करें तो वह जोड़ियां बनाकर शिकार करते हैं। इस सीरीज में खेले गये ज्यादातर मैच में कप्तान परिस्थितियों को देखते हुए हर समय कम से कम एक तेज गेंदबाज खिलाने के पक्ष में नजर आये हैं। ऐसे में अगर कप्तान के पास सिर्फ 3 ही तेज गेंदबाज होंगे तो उसे अपने एक गेंदबाज को ज्यादा खींचना पड़ेगा और बाकी दो गेंदबाजों को लगातार बदलते रहना होगा। अगर आपका हर तेज गेंदबाज अच्छी गेंदबाजी कर रहा है तो पारी के अंत तक लगभग हर गेंदबाज एक जितनी गेंदबाजी करता नजर आयेगा।
लेकिन तीन गेंदबाजों के साथ कप्तान को दिक्कत तब आती है जब किसी एक गेंदबाज का खराब दिन आ जाये। ऐसे में कप्तान के लिये अपने गेंदबाजों को आराम देने के लिये स्पिन का इस्तेमाल करना पड़ता है और परिस्थितियां अगर उनके अनुकूल नहीं हो तो कप्तान की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। यही वजह रही है कि भारतीय कप्तान इस सीरीज में 4 तेज गेंदबाजों के टेंपलेट के साथ टिके हुए हैं।

इस वजह से अश्विन को न खिलाने का फैसला बिल्कुल सही
बतौर क्रिकेटर अश्विन की बात करें तो वो शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं और अपने खेल में लगातार बदलाव करने की काबिलियत के चलते उन्हें विकेट लेने के लिये पिच से मदद की जरूरत नहीं होती है। यहीं वजह है कि अश्विन विदेशी सरजमीं हो या फिर घरेलू मैदान दोनों ही जगह लगभग उतने ही खतरनाक नजर आते हैं। अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल के जरिये भारतीय ड्रेसिंग रूम की कहानियां फैन्स के साथ साझा की है जिसके चलते उनकी पॉपुलैरिटी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है और शायद यही कारण है कि सोशल मीडिया पर जो लोग लगातार अश्विन को बाहर किये जाने पर सवाल उठा रहे हैं वो क्रिकेट के जुड़े कारण को नजरअंदाज कर रहे हैं।
गौरतलब है कि इस सीरीज की बात करें तो जसप्रीत बुमराह ने अब तक 16 विकेट चटकाये हैं तो मोहम्मद सिराज ने 15 विकेट तो मोहम्मद शमी के खाते में 11 विकेट आये हैं। वहीं पर चौथे तेज गेंदबाज की बात करें तो संयुक्त रूप से इस नंबर पर 13 विकेट हासिल किये हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अश्विन भारत के लिये इतने ही सफल गेंदबाज साबित होते जितना की चौथा तेज गेंदबाज हुआ है। यही वजह है जिसके चलते अश्विन को टीम में जगह नहीं मिल पा रही है और अश्विन को टीम में शामिल नहीं करने का फैसला बिल्कुल सही नजर आता है। हो सकता है के ओवल टेस्ट मैच का नतीजा एक समय के लिये आपको अश्विन की जगह जडेजा को खिलाना गलत नजर आये लेकिन क्रिकेट के लॉजिक की बात करें तो यह फैसला गलत नहीं लगता है।


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