IND vs SA: वक्त आ गया है कि बदल दिया जाये यह बड़ा नियम, क्रिकेट को उठाना पड़ रहा है नुकसान
नई दिल्ली। क्रिकेट के खेल के लगभग 135 साल के इतिहास में चीजें अब तक काफी बदल चुकी हैं। इस खेल के कई नियम जो शुरुआती समय में शामिल थे वो आज के समय में पूरी तरह से लुप्त हो चुके हैं। मौजूदा समय में भी क्रिकेट के जगत में हमें आये दिन नियमों में बदलाव देखने को मिलते रहते हैं, फिर चाहे वो नये नियमों को जोड़ना हो या फिर पुराने नियमों को खत्म करना है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल लगातार इन नियमों पर नजर बनाकर रखती है और समय के साथ उनमें बदलाव करने को लेकर फैसला करती हैं। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेली जा रही 3 मैचों की टेस्ट सीरीज के दूसरे मैच में केएल राहुल भारतीय टीम की दूसरी पारी में जिस तरह से आउट हुए उसने क्रिकेट के एक बड़े नियम को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।
दरअसल दूसरी पारी में भारतीय टीम के कप्तान और सलामी बल्लेबाज केएल राहुल बल्लेबाजी कर रहे थे तो पारी के 7वें ओवर में मार्को जेंसन की गेंद पर एडेन मार्करम ने कैच पकड़ा और विकेट की अपील की। अंपायर्स एडेन मार्करम के कैच पर क्लियर नहीं थे कि क्या यह पूरी तरह से क्लीन कैच था या फिर गेंद उनके हाथ में जाने से पहले मैदान पर गिरी थी।
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सॉफ्ट सिग्नल के चलते राहुल को भुगतना पड़ा खामियाजा
अंपायर्स ने तीसरे अंपायर से मदद लेने का फैसला किया, हालांकि क्रिकेट के अनुसार अगर मैदानी अंपायर को थर्ड अंपायर की तरफ रुख करना है तो उसे एक सॉफ्ट सिग्नल देने की जरूरत होती है। आईसीसी के आर्टिकल 2.12 नियम के तहत अगर थर्ड अंपायर को मैदानी अंपायर के फैसले को पलटना है तो उसके पास कनक्लूसिव एविडेंस होना जरूरी है। ऐसे में जब अंपायर केएल राहुल के विकेट पर थर्ड अंपायर की मदद लेने पहुंचे तो सॉफ्ट सिग्नल के रूप में उन्होंने आउट का इशारा किया।
एडेन मार्करम के इस कैच को लेकर जब तीसरे अंपायर ने रिप्ले देखा तो काफी हद तक साफ नजर आ रहा था कि गेंद एडेन मार्करम के हाथ में जाने से पहले टप्पा खाकर पहुंची है। हालांकि थर्ड अंपायर ने सॉफ्ट सिग्नल में केएल राहुल को आउट दिये जाने की वजह से फैसले को बरकरार रखना पड़ा क्योंकि मैदानी अंपायर के फैसले को पलटने के लिये निर्णायक सबूत नहीं थे, जिसकी वजह से केएल राहुल को आउट दिया गया। इस विकेट के दौरान केएल राहुल को आउट देने में जिस चीज ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई वो था सॉफ्ट सिग्नल।

क्या खत्म कर देना चाहिये आईसीसी को यह नियम
केएल राहुल के इस विकेट के बाद फैन्स और दिग्गजों के बीच बहस छिड़ गई है कि क्या वक्त आ गया है कि आईसीसी को सॉफ्ट सिग्नल के नियम को खत्म कर देना चाहिये। गौरलतब है कि पिछले 2 साल के अंदर कई ऐसे कैच देखने को मिले हैं, जहां पर सॉफ्ट सिग्नल के चलते खिलाड़ियों को वापस जाना पड़ा है। ऐसे में जब मौजूदा समय में तकनीक उपलब्ध है जो कि फैसला लेने में अहम रोल निभा सकते हैं तो क्या अंपायर्स को सॉफ्ट सिग्नल देने की जिम्मेदारी से मुक्त कर देना चाहिये।
उल्लेखनीय है कि मैदानी अंपायर थर्ड अंपायर की ओर तभी रुख करता है जब उसे अपने फैसले पर मदद की दरकार होती है। वहां पर अगर आप उसे सॉफ्ट सिग्नल देना अनिवार्य करेंगे तो थर्ड अंपायर के लिये सही फैसला दे पाना मुश्किल कर देते हैं।

आईपीएल ने 2 साल पहले खत्म कर दिया है यह नियम
आपको बता दें कि आईपीएल 2020 में पहली बार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पूरे टूर्नामेंट से सॉफ्ट सिग्नल के नियम पर रोक लगा दी है, जिसकी वजह से अंपायर्स को जिन फैसलों पर कन्फ्यूजन होती है वो उसको लेकर पूरी तरह से थर्ड अंपायर पर निर्भर हो सकें और थर्ड अंपायर्स को बिना किसी फैसले पर बाध्य हो कर डिसीजन देना आसान हो जाता है। आईपीएल के 13वें और 14वें सीजन के दौरान सॉफ्ट सिग्नल को हटा देने से अंपायरिंग में काफी फायदा देखने को मिला है। ऐसे में क्या अब वक्त आ गया है कि आईसीसी को भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सॉफ्ट सिग्नल के नियम को खत्म कर देना चाहिये।
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