BCCI के वर्कलोड मैनेजमेंट से नाराज हुए उमेश यादव, नहीं खेल पायेंगे काउंटी

नई दिल्ली। भारतीय टेस्ट टीम के नियमित तेज गेंदबाज इन दिनों बीसीसीआई से नाराज चल रहे हैं। इसका मुख्य कारण है बीसीसीआई की वर्कलोड मैनेजमेंट की नीति जिसके तहत कई बार खिलाड़ियों को काउंटी खेलने से भी रोक दिया जाता है। बीसीसीआई की इस नीति से नाराज उमेश यादव ने कहा कि वर्कलोड मैनेजमेंट की इस नीति के चलते उन्हें काउंटी क्रिकेट खेलने के प्रस्ताव को इंकार करना पड़ा।

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रविवार से दिल्ली और विदर्भ के बीच शुरू होने वाले रणजी ट्रॉफी मैच से पहले उमेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें ग्लोसेस्टशर से खेलने का ऑफर मिला था, लेकिन बोर्ड के वर्कलोड मैनेजमेंट नीति के चलते उन्हें इसे मना करना पड़ा।

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वर्कलोड मैनेजमेंट पॉलिसी के चलते नहीं खेल सका ज्यादा क्रिकेट

वर्कलोड मैनेजमेंट पॉलिसी के चलते नहीं खेल सका ज्यादा क्रिकेट

उमेश यादव ने बताया कि बीसीसीआई की वर्कलोड मैनेजमेंट नीति के चलते वो 2 या 3 मैच से ज्यादा नहीं खेल सकते थे इसलिये करार नहीं हो सका।

उन्होंने बताया, 'पिछले सीजन मुझे ग्लोसेस्टशर से प्रस्ताव भी मिला था। काउंटी चाहती थी कि मैं उनके साथ सात मैच खेलूं लेकिन बीसीसीआई की वर्कलोड मैनजेमेंट नीति के कारण मैं दो-तीन मैच से ज्यादा नहीं खेल सकता था। इसलिए यह करार काम नहीं किया। साथ ही मुझे आईपीएल में चोट भी लग गई थी।'

वर्कलोड नीति को खिलाड़ियों के परिपेक्ष्य में देखने की जरूरत

वर्कलोड नीति को खिलाड़ियों के परिपेक्ष्य में देखने की जरूरत

उमेश के इस बयान के यह सवाल उठा कि क्या वर्कलोड पॉलिसी को एक बार फिर से देखने की जरूरत है जिस पर उमेश ने कहा कि इसे आप सभी के लिये एक नहीं बना सकते। यह मैच के समय और एक खिलाड़ी को उसके स्थान के हिसाब से किस तरह लिया जाता है इस बात पर ध्यान देना चाहिये।

उन्होंने कहा, 'वर्कलोड मैनेजमेंट वो चीज है जो तब चीजों को संतुलन में लाने के लिए उपयोग में लाई जाती है जब आप लगातार मैच खेल रहे हो। मेरा मामला इससे उलट है। मैं बीते दो साल में कम से कम खेला हूं। इसलिए मेरे ऊपर ज्यादा वर्कलोड नहीं था।'

उमेश के करियर के लिये काफी अहम है 4-5 साल

उमेश के करियर के लिये काफी अहम है 4-5 साल

उमेश यादव ने अपने करियर को लेकर बात करते हुए कहा कि मेरे लिये आने वाले 4-5 साल काफी अहम है। इस दौरान मैं जितनी ज्यादा क्रिकेट खेलू उतना ज्यादा अच्छा है।

उन्होंने कहा, 'मैं 31 साल का हूं और अगले 4-5 साल मेरे लिए काफी अहम हैं। अगर आप मेरे रिकार्ड को देखेंगे तो मैंने 2019 में 4 टेस्ट मैच खेले हैं और उससे पहले 2018 में भी 4 ही मैच खेले थे। सीमित ओवरों में बीते दो साल में मैंने सिर्फ एक मैच खेला है।'

उमेश ने कहा कि इस उम्र में, मैं जितनी गेंदबाजी करूंगा मैं उतना बेहतर रहूंगा। इसलिए मैं इस मैच के बाद पांच प्रथम श्रेणी मैच खेलूंगा।

ज्यादा मैच न होने से परेशान हैं उमेश यादव

ज्यादा मैच न होने से परेशान हैं उमेश यादव

गौरतलब है कि भारतीय चयनकर्ता उमेश यादव को टेस्ट स्पेशलिस्ट गेंदबाज के तौर पर ददेखते हैं। ऐसे में इस साल न्यूजीलैंड दौरे के बाद उनके पास ज्यादा क्रिकेट खेलने को नहीं बचेगी।

उन्होंने कहा, 'मेरे सामने आगामी न्यूजीलैंड दौरा है जहां पर 2 टेस्ट मैच होने हैं और साल के अंत में टी20 विश्व कप। पिछले 2 साल से मैं सीमित ओवर क्रिकेट में वापसी नहीं कर पाया हूं, ऐसे में न्यूजीलैंड दौरे के बाद मेरे पास सिर्फ आईपीएल बचेगा। अगर मैं न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम में नहीं चुना जाता हूं तो मेरे पास ज्यादा कुछ बचेगा नहीं।'

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Story first published: Sunday, January 19, 2020, 13:00 [IST]
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