
आईसीसी टूर्नामेंट में भारत की नाकामी
बतौर वनडे कप्तान विराट कोहली के रिकॉर्ड की बात करें तो वो बेहद शानदार रहा है जिसमें उन्होंने 95 मैचों में भारतीय टीम की कमान संभालकर उसे 65 मैचों में जीत दिलाई। इस दौरान उसे 27 मैचों में हार का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से उनका जीत प्रतिशत 70.43 का है। इस प्रारूप में कोहली का जीत प्रतिशत विश्वकप विजेता कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (59.52) और कपिल देव (54.16) से भी बेहतर रहा है। कोहली की कप्तानी में भारत ने 19 द्विपक्षीय सीरीज खेली हैं और 15 में जीत हासिल की है। इस दौरान उनकी कप्तानी वाली टीम ने साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर ऐतिहासिक सीरीज में जीत दर्ज की।
हालांकि इतनी कामयाबी के बावजूद विराट कोहली के पक्ष में जो बात नहीं गई वो थी आईसीसी टूर्नामेंट में टीम को लगातार मिल रही नाकामी, साल 2016 में जब विराट कोहली ने टीम की कमान संभाली उसके बाद से वो दो बार वनडे प्रारूप के आईसीसी टूर्नामेंट (चैम्पियन्स ट्रॉफी 2017 और 2019 विश्व कप) का हिस्सा रह चुके हैं और दोनों में बार ही भारत को हार का सामना करना पड़ा, जबकि एशिया कप 2018 में भारत को रोहित शर्मा की कप्तानी में जीत मिली है। ऐसे में मल्टी नेशन टूर्नामेंट में कोहली की कप्तानी में जीत का आंकड़ा शून्य रहा है जो कि उनकी कप्तानी जारी रखने के फैसले का विरोध करता नजर आया।

रोहित शर्मा के बढ़ते कद ने भी पैदा की मुश्किल
विराट कोहली ने पहले ही साफ किया था कि वो 2023 के वनडे विश्वकप तक टीम की कमान संभालना चाहते हैं, हालांकि बीसीसीआई के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि वो सीमित ओवर्स प्रारूप की कप्तानी में सिर्फ ओवर्स की संख्या बदलने की वजह से कप्तान बदलने की ओर नहीं देखना चाह रही है। विराट कोहली के लिये कप्तानी जारी न रख पाने के फैसले के पीछे दूसरी बड़ी वजह उपकप्तान रोहित शर्मा का बढ़ता कद भी बनी, जिन्होंने पिछले कुछ सालों में सीमित ओवर्स प्रारूप की कप्तानी में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। भारत की ओर से कप्तानी करते हुए पहले निदाहास ट्रॉफी, एशिया कप, 5 आईपीएल खिताब और फिर कीवी टीम को टी20 सीरीज में क्लीन स्वीप कर रोहित शर्मा ने अपने नेतृत्व की क्षमता को बार-बार साबित किया है।
वहीं पर विराट कोहली के लिये चैम्पियन्स ट्रॉफी, टी20 विश्वकप, वनडे विश्वकप, विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप और आईपीएल का एक भी खिताब न जीत पाना उनकी कप्तानी पर लगातार सवालिया निशान उठाता नजर आया, इतना ही नहीं बीसीसीआई ने टेस्ट प्रारूप में भी रोहित को उपकप्तान की जिम्मेदारी सौंपी है, जो कि कप्तानी में उनके बढ़ते कद की ओर इशारा करता है। यही वजह है कि बीसीसीआई ने रोहित शर्मा को बढ़ते कद को मौका देने का फैसला किया और उन्हें टीम की कमान सौंप दी।

नये कप्तान के साथ नये अध्याय की शुरुआत
भारत के लिये आईसीसी टूर्नामेंट में खिताब न जीत पाने का सिलसिला 8 सालों से चला आ रहा है। इस दौरान ऐसा नहीं रहा है कि भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा हो, उसने लगभग हर टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन इन टूर्नामेंट के दौरान जब भी नॉकआउट स्टेज पर उससे सबसे ज्यादा जरुरत हुई तो उसे हार का सामना करना पड़ा। इसी को देखते हुए जब बीसीसीआई ने 2019 में रवि शास्त्री के नेतृत्व वाले टीम मैनेजमेंट का करार रिन्यू किया तो सिर्फ 2020 टी20 विश्वकप तक ही देखने का विचार किया। हालांकि कोरोना वायरस के संक्रमण ने इस टीम मैनेजमेंट को एक साल अतिरिक्त दे दिया, लेकिन बावजूद इसके जब वो नाकाम रही तो बोर्ड ने नये सिरे से काम करने का विचार किया।
इसी वजह से उसने मैनेजमेंट में विक्रम राठौर को छोड़कर किसी के करार को रिन्यू नहीं किया और जब राहुल द्रविड़ के नेतृत्व वाली मैनेजमेंट ने कमान संभाली तो उसे रोहित शर्मा के साथ काम करने का मौका दिया। बीसीसीआई जल्द से जल्द आईसीसी खिताब के सूखे को खत्म करना चाहता है, जिसके चलते वह नये कप्तान और कोच के साथ भारतीय क्रिकेट की नई शुरुआत करना चाहता है ताकि सीमित ओवर्स प्रारूप में उसे किसी भी पुरानी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।


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