कभी कहलाता था भारत का दूसरा सुनील गावस्कर, लेकिन 37 मैच में खत्म हो गया करियर

नई दिल्ली। भारत में जब से क्रिकेट की शुरुआत हुई है तबसे भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक देखने लायक है। वहीं भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास की बात करें तो अब तक कई ऐसे बल्लेबाज हुए हैं जो कि तकनीकी रूप से दुनिया के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक थे। जब भी भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे महान बल्लेबाजों की बात की जाती है तो पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर का नाम लिया जाता है, जिनकी बल्लेबाजी तकनीक को दुनिया सलाम करती है। इन खिलाड़ियों ने अपनी तकनीक के दम पर दुनिया भर में नाम कमाया और करियर बनाया।

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वहीं कुछ ऐसे भी बल्लेबाज हुए जिनकी तकनीक इन खिलाड़ियों की तरह ही थी लेकिन करियर में वो मुकाम हासिल नहीं कर सके जो बाकी खिलाड़ियों ने की। आज हम ऐसे ही एक भारतीय बल्लेबाज की बात करने जा रहे हैं जिसे भारतीय क्रिकेट का दूसरा सुनील गावस्कर माना जाता था लेकिन उनका करियर ज्यादा लंबा नहीं चल सका। अपनी तकनीक के सहारे ही उन्होंने काफी नाम भी कमाया।

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कभी कहलाते थे भारत के सुनील गावस्कर

कभी कहलाते थे भारत के सुनील गावस्कर

हम भारतीय क्रिकेट टीम के जिस बल्लेबाज की बात कर रहे हैं वो मौजूदा समय में दुनिया के बड़े कॉमेंटेटर बन गये हैं। हम बात कर रहे हैं संजय मांजरेकर की जो कि बल्लेबाजी तकनीक के मामले में जबरदस्त खिलाड़ी माने जाते रहे हैं। बहुत ही जबरदस्त तकनीकी दक्षता वाले खिलाड़ी रहे हैं। हाल ही में संजय मांजरेकर ने अपना 55 वां जन्मदिन मनाया।

तकनीक के मामले में थे काफी मजबूत

तकनीक के मामले में थे काफी मजबूत

अपने पिता विजय मांजरेकर के चलते संजय मांजरेकर ने क्रिकेट को चुना और साल 1987 में उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ डेब्यू करने का मौका मिला। संजय मांजरेकर ने अपनी डेब्यू सीरीज में कुछ खास तो नहीं किया लेकिन इस दौरान उन्होंने अफनी बल्लेबाजी तकनीक का नमूना दिखा दिया। 1989 में जब भारतीय क्रिकेट टीम वेस्टइंडीज दौरे पर गई तो वहां पर ब्रिजटाउन के मैदान पर उन्होंने शानदार पारी खेलते हुए 108 रन बनाये और साबित कर दिया उनमें काबिलियत है।

इस दौरे पर संजय मांजरेकर का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा और इसी के चलते कैरिबियाई टीम के दिग्गज बल्लेबाज सर विवियन रिचर्ड्स ने उन्हे भारत का अगला सुनील गावस्कर करार दिया।

संजय मांजरेकर की तारीफ करते हुए विव रिचर्ड्स ने कहा,'संजय के रूप में भारत ने एक गावस्कर पाया है। उसके पास सबकुछ है। उत्कृष्ट तकनीक, हिम्मत और दृढ़ संकल्प।'

पाकिस्तान के खिलाफ किया था शानदार प्रदर्शन

पाकिस्तान के खिलाफ किया था शानदार प्रदर्शन

वेस्टइंडीज दौरे के बाद भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे जैसी कमजोर टीम के खिलाफ 1992 में पहली बार टेस्ट खेला। जिम्बाब्वे की टीम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 456 रनों का स्कोर खड़ा किया और भारत ने रनों का पीछा करते हुए अपने शुरुआती विकेट खो दिये। लेकिन तभी बल्लेबाजी के लिये संजय मांजरेकर क्रीज पर उतरे और टीम को इस मुश्किल से बाहर निकाला।

संजय मांजरेकर ने 9 घंटों तक क्रीज पर मैराथन पारी खेलकर 422 गेंदों का सामना किया और 104 रन की पारी खेली। इसके बाद संजय मांजरेकर ने पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज में भी कमाल किया और 4 टेस्ट मैचों में 2 शतक और 3 अर्धशतक की मदद से 569 रन बनाए। इसके बाद उनका कद और भी बड़ा हो गया।

द्रविड़-गांगुली के चलते खत्म हुआ करियर

द्रविड़-गांगुली के चलते खत्म हुआ करियर

हालांकि भारतीय टीम के इस बल्लेबाज के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी दिखाई दी, हालांकि फिर भी वह साल 1996 तक भारतीय टीम के लिये खेलते रहे। तभी भारतीय टीम में सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ के रूप में दो शानदार खिलाड़ियों का आगमन हुआ जिसके बाद उन्हें बाहर बैठना पड़ा। संजय मांजरेकर का करियर महज 37 टेस्ट मैच के बाद खत्म हो गया। मांजरेकर ने 37 टेस्ट मैचों में 2043 रन और 74 वनडे मैचों में 1994 रन बनाए।

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Story first published: Wednesday, July 15, 2020, 21:28 [IST]
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