
बुमराह ने दिया था बायोबबल से होने वाली परेशानी का हवाला
भारत के लिये टी20 विश्वकप का ऐसा आगाज बहुत ही शर्मनाक है, खासतौर से तब जब इन पिचों पर भारतीय टीम के खिलाड़ी एक महीने तक आईपीएल खेलकर आ रहे हैं, माना जा रहा था कि यूएई में आईपीएल को शिफ्ट करने से भारत को सबसे ज्यादा फायदा होगा लेकिन जिस तरह से उसने प्रदर्शन किया है, वह टीम मैनेजमेंट पर भी कई सवाल खड़े करता है। इस बीच कई पूर्व क्रिकेटर और भारतीय फैन्स खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना कर रहे हैं, लेकिन क्या सच में यहां पर गलती खिलाड़ियों की है या फिर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से कोई बड़ी गलती हो रही है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार के बाद जब जसप्रीत बुमराह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारी टीम पिछले 6 महीनों से लगातार बायोबबल में है, यह छोटा वक्त नहीं है और जब आप अपने परिवार से इतने लंबे समय तक दूर रहते हैं तो खिलाड़ियों पर भी इसका असर होता है। मुझे लगता है कि हमारी टीम भी बायोबबल से होने वाली परेशानी झेल रही है।

हेक्टिक शेड्यूल से खिलाड़ियों पर पड़ता है मानसिक असर
उल्लेखनीय है कि जब से दुनिया भर में कोरोना वायरस की महामारी ने दहशत फैलाई है तब से क्रिकेट का खेल पूरी तरह से बदल गया है। खिलाड़ियों को सीरीज खेलने के लिये कम से कम 10 से 15 दिन पहले मेजबान देश पहुंचना होता है, जहां पर सख्त क्वारंटीन और बायोबबल प्रोटोकॉल के बीच खिलाड़ी मैच खेलते हैं, इस दौरान उनके बायोबबल छोड़कर बाहर जाने पर रोक लगी होती है। ऐसे में खिलाड़ियों के लिये पहले की तरह सीरीज खेल पाना मुश्किल हो जाता है, हालांकि इसके बावजूद भारतीय टीम के कैलेंडर पर नजर डालें तो बहुत मुश्किल से ही कोई गैप नजर आता है।

नवंबर 2020 से लगातार बायोबबल में खेल रहे हैं खिलाड़ी
साल 2020 में जब कोरोना वायरस का प्रकोप फैलना शुरू हुआ तो दुनिया भर में लॉकडाउन देखने को मिला, इस दौरान प्रस्तावित कई सारी द्विपक्षीय सीरीज और टूर्नामेंट को स्थगित करना पड़ा। आईसीसी ने खिलाड़ियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए नये प्रोटोकॉल तैयार किये जिसके बाद बायोबबल में फिर से खेल शुरू हुआ। बायोबबल ने खिलाड़ियों को कोरोना से तो बचाया लेकिन मेंटल हेल्थ पर काफी असर होने लगा। ऐसे में बोर्ड को खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट और बायोबबल की परेशानी से बचाने के लिये समय-समय पर आराम देना जरूरी है, हालांकि भारतीय टीम के मामले में ऐसा देखने के नहीं मिला है।
पिछले साल नवंबर से शुरू करें तो भारतीय टीम ने पहले ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया, जहां से वापस लौटते ही उसने इंग्लैंड के खिलाफ तीनों प्रारूप की सीरीज खेली। सीरीज के खत्म होते ही भारतीय टीम के खिलाड़ी आईपीएल 2021 के पहले लेग का हिस्सा बने और कोरोना ब्रेकआउट होने के चलते एक महीने का ब्रेक मिला। हालांकि खिलाड़ी 20 मई से फिर से बायोबबल का हिस्सा बने ताकि विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल खेल सकें। 4 जून से इंग्लैंड दौरे पर पहुंची भारतीय टीम 12 सितंबर तक बायोबबल का हिस्सा रही और सीधे यूएई में आईपीएल 2021 के बचे हुए मैच खेलने पहुंची और आईपीएल के खत्म होते ही टी20 विश्वकप का हिस्सा बनी। ऐसे में शेड्यूल पर नजर डालें तो भारतीय टीम को सांस लेने का मौका नहीं मिला है और ऐसा एक भी महीना नहीं जहां पर उसके खिलाड़ी किसी सीरीज में खेलते नजर न आ रहे हों।

दुनिया की बाकी टीमों से ज्यादा हेकटेक है भारत का शेड्यूल
यह सिलसिला यहीं पर खत्म नहीं होता, टी20 विश्वकप के तुरंत बाद भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 और टेस्ट सीरीज की मेजबानी करनी है। इस सीरीज के तुरंत बाद भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर तीनों प्रारूप की सीरीज खेलने जायेगी। 26 जनवरी तक चलने वाले इस दौरे के समाप्त होने के बाद भारत को 7 फरवरी से वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज खेलनी है और फिर महीने के अंत में श्रीलंका की मेजबानी करनी है। 18 मार्च को श्रीलंका के खिलाफ सीरीज का आखिरी मैच खेलने के बाद बीसीसीआई आईपीएल 2022 के आयोजन की ओर देखेगा जहां पर इस बार 10 टीमें हिस्सा लेंगी और 74 मैचों का आयोजन होगा। ऐसे में खिलाड़ी अपनी-अपनी टीमों के साथ इस लीग का हिस्सा बनेंगे, जिसके आगाज की उम्मीद 25 मार्च से 10 जून तक की है। आईपीएल के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ियों को इंग्लैंड दौरे (1 जुलाई) पर जाना है जिसके लिये वह 15 जून तक रवाना होगी।
दुनिया की बाकी किसी भी टीम के क्रिकेट कैलेंडर पर नजर डालें तो उसके खिलाड़ी इतने हेक्टिक शेड्यूल में नहीं खेलते हैं जितना कि भारतीय टीम के नजर आते हैं, ऐसे में बायोबबल से होने वाली परेशानी मानसिक रूप से भी प्रभाव डालती है, जिसके चलते भारतीय टीम द्विपक्षीय सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करती है लेकिन जब तक आईसीसी टूर्नामेंट खेलने की बारी आती है तब तक खिलाड़ी इतना थक चुके होते हैं कि उनकी एक गलती खिताब से दूर ले जाती है।

बायोबबल में रहकर खेलना काफी मुश्किल
गौरतलब है कि बुमराह ने बायोबबल से होने वाली परेशानी पर जोर देते हुए बीसीसीआई की तारीफ भी कि वो अपनी तरफ से हर कोशिश कर रहे हैं कि खिलाड़ियों को बायोबबल में आराम मिल सके। हालांकि आप कितनी भी कोशिश कर लो लेकिन बायोबबल का प्रभाव कहीं न कहीं देखने को जरूर मिल जाता है।
उन्होंने कहा,'कई बार ऐसा होता है कि आपको ब्रेक की जरूरत होती है, आप अपने परिवार को याद करते हैं। आप 6 महीने से सफर कर रहे हैं और बायोबबल में परिवार से इतने लंबे समय तक दूर रहने का काफी गहरा असर भी होता है। बीसीसीआई अपनी तरफ से आराम देने के लिये हर मुमकिन प्रयास करती है लेकिन यह मुश्किल समय है और महामारी के बीच हम बायोबबल की मुश्किलों के बीच खेलना सीख रहे हैं। इसके बावजूद कई बार मानसिक परेशानी आप पर असर कर ही जाती है।'


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