सबसे 'बोरियत' भरा फॉर्मेट होने के बावजूद टेस्ट क्रिकेट पर ही क्यों फोकस कर रहे हैं विराट कोहली

नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली ने टी20 की कप्तानी छोड़ दी। इसके बाद से ही कयास थे कि कोहली अब टी20 से धीरे-धीरे विदाई भी ले लेंगे। कई पूर्व क्रिकेट दिग्गजों ने कोहली को सभी फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ने की भी सलाह दी। कोहली अपनी उम्र के 33 साल पार कर चुके हैं और यह तय है कि उनका शरीर बहुत तेजी से तीनों फॉर्मेट की जरूरत के प्रति थकान महसूस करने जा रहा है। अब भारतीय टीम के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री भी साफ कर चुके हैं कि विराट कोहली जल्द ही वनडे क्रिकेट से भी कप्तान छोड़ दें तो हैरानी की बात नहीं है।

टेस्ट क्रिकेट ही कोहली के लिए सबसे अहम है-

टेस्ट क्रिकेट ही कोहली के लिए सबसे अहम है-

शास्त्री ने यहां ये बात भी साफ की है कि विराट टेस्ट क्रिकेट पर फोकस करना चाहेंगे। अब सवाल यह है कि कोहली क्रिकेट की सबसे लुभावने फॉर्मेट को छोड़कर उस टेस्ट क्रिकेट की ओर क्यों जा रहे हैं जो कई लोगों की नजरों में टी20 की तुलना में बहुत बोरियत भरा फॉर्मेट है?

रवि शास्त्री ने यह सब बातें हवा में नहीं की हैं क्योंकि इनके पीछे पूरी सच्चाई है कि विराट कोहली के लिए टेस्ट क्रिकेट ही प्राथमिकता में है। विराट पिछले साल जून में यह क्लियर कर चुके हैं कि टेस्ट क्रिकेट के रोमांच के आसपास दुनिया में बाकी कुछ नहीं फटकता। उन्होंने इंस्टाग्राम पर यह पोस्ट की थी और खुद को भाग्यशाली बताया था कि वे भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल पाए।

चुनौतियों को स्वीकारने में आता है मजा

चुनौतियों को स्वीकारने में आता है मजा

विराट कोहली द्वारा टेस्ट क्रिकेट को पसंद करने के पीछे कुछ कारण हैं। एक तो टेस्ट ही क्रिकेट का सबसे मुश्किल फॉर्मेट है और कोहली की शख्सियत ऐसी है कि उनको चुनौतियां स्वीकारने में मजा आता है। टेस्ट ने कोहली का टेस्ट लिया और उन्होंने कुछ लड़खड़ाहट के बाद खुद को रेड बॉल क्रिकेट का भी बेजोड़ बल्लेबाज बना लिया। इसने उनके विकास में अहम भूमिका निभाई है। कोहली ने खुद यह बात केविन पीटरसन के साथ हुई बातचीत में स्वीकार की थी। कोहली ने साफ कहा था कि टेस्ट क्रिकेट ने उनको बेहतर इंसान बनाया है क्योंकि टेस्ट मैच एक जीवन की तरह उतार-चढ़ाव भरा होता है।

कोहली का टेस्ट मैचों को लेकर प्यार इसी बात से झलकता है कि उन्होंने साफ कर दिया था कि वह चार दिन के टेस्ट के पक्ष में नहीं है क्योंकि यह खेल के सबसे शुद्ध प्रारूप के साथ छेड़छाड़ करना होगा।

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कोहली की जरूरत की पूर्ति टेस्ट फॉर्मेट ही कर सकता है-

कोहली की जरूरत की पूर्ति टेस्ट फॉर्मेट ही कर सकता है-

विराट वनडे या टी20 में कितने भी रनों का अंबार लगा दें लेकिन वे जानते हैं कि टेस्ट की परीक्षा में पास हुए बिना कोई भी उनको कंपलीट बल्लेबाज के तौर पर स्वीकार नहीं करेगा। टेस्ट क्रिकेट में दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ बॉलर अपनी पूरी क्षमता के साथ खेलते हैं। कई बार वे बॉलर सफेद गेंद गेम्स में आपको या तो दिखाई नहीं देंगे या फिर बहुत कम दिखेंगे। जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड ऐसे ही बॉलर हैं। 21वीं सदी के महानतम तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने भी सबसे खतरनाक गेंदबाजी टेस्ट मैचों में की थी।

कोहली के पर्सनलिटी में जो पैशन है वह उनको दुनिया में बेस्ट से टकराने की ललक पैदा कराता है। समय के साथ विराट में एक दार्शनिक अंदाज भी आया है। टेस्ट क्रिकेट विराट कोहली की पूर्ति दोनों स्तर पर कर रहा है- एक खिलाड़ी के स्तर पर भी और एक इंसान के भी।

टेस्ट क्रिकेट ने कोहली को दुनिया में लोकप्रियता दिलाई है-

टेस्ट क्रिकेट ने कोहली को दुनिया में लोकप्रियता दिलाई है-

टेस्ट पांच दिन तक चलता है और हर किसी के बस में इसको देखना और समझना नहीं है। इसी वजह से यह फॉर्मेट कई बार बोरियत भरा मान लिया जाता है। लेकिन क्रिकेट के दिग्गज जानते हैं कि क्रिकेट कहीं हैं तो वह टेस्ट मैचों में ही दिखेगा। यहां पर दुनिया के लीजेंड पूर्व क्रिकेटर कोहली को आधुनिक समय में टेस्ट क्रिकेट का हीरो मानते हैं। एक ऐसा नायक जिसने इस फॉर्मेट में सही समय पर बहुत जरूरी जान फूंक दी।

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ कह चुके हैं कि कोहली ने टेस्ट क्रिकेट को चुनकर इस फॉर्मेट को जिंदा रखा है क्योंकि भारत ऐसा देश है जो आईपीएल को प्यार करता है। यहां विराट कोहली द्वारा टेस्ट को पसंद करना दुनिया के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश देता है। स्मिथ ने साल 2018 में कोहली को सुपरस्टार बताते हुए कहा था कि क्रिकेट की दुनिया में आज ऐसे सितारों की बेहद कमी है।

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ठीक ऐसी ही बात महान शेन वार्न ने कोहली के लिए कही थी। ये इसी साल इंग्लैंड दौरे पर गई टीम इंडिया की बात है। तब भारत ने द ओवल टेस्ट जीतकर 2-1 की अपराजेय बढ़त टेस्ट सीरीज में हासिल कर ली थी। वार्न ने कहा था कि दुनिया को कोहली का शुक्रिया अदा करना चाहिए। यहां तक की उन्होंने कोहली को दुनिया का सबसे बड़ा सुपरस्टार भी कहा था। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर भी कोहली को लेकर ऐसी ही तारीफ कर चुके हैं।

रवि शास्त्री की भूमिका-

रवि शास्त्री की भूमिका-

यहां रवि शास्त्री की भूमिका का जिक्र करना भी काफी अहम होगा जिन्होंने विराट कोहली के साथ कोच-कप्तान की ऐसी हिट जोड़ी दी जिसने साथ में भारतीय टेस्ट इतिहास का गोल्डन टाइम देखा। शास्त्री को 2017 में हेड कोच बनाया गया और इससे पहले भारतीय क्रिकेट के डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। इन दोनों पर एक दूसरे के साथ का बड़ा ही पॉजिटिव प्रभाव पड़ा है। शास्त्री ने भी टेस्ट क्रिकेट को ही सबसे ऊंचा दर्जा दिया है। उन्होंने कोचिंग कार्यकाल पूरा करने के बाद जो इंटरव्यू दिया है उसमें भी स्पष्ट किया है कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर जाकर जो दो बार टेस्ट सीरीज जीती उनका मुकाबला कोई भी उपलब्धि नहीं कर सकती। शास्त्री क्लियर कट कहते हैं कि, देखों भाई रेड बॉल क्रिकेट ही असली है।

शायद यही है वजह है कोहली और शास्त्री की अगुवाई में भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट फॉर्मेट में 5 सालों से नंबर एक बनी हुई है।

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Story first published: Saturday, November 13, 2021, 22:30 [IST]
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